मनचेरियल | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 132वें एपिसोड में तेलंगाना के मनचेरियल जिले स्थित मुदीगुंटा गांव के निवासियों की मुक्तकंठ से सराहना की है। पीएम ने कहा कि इस गांव ने जल संरक्षण को एक सच्चा ‘जन आंदोलन’ बनाकर पूरे देश के सामने मिसाल पेश की है। 1,571 की आबादी वाले इस छोटे से गांव के 443 घरों में से 353 घरों में सोख्ता गड्ढों (Soak Pits) का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। ग्रामीणों के इस समर्पण की बदौलत आज गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और जल संचयन के उनके प्रयासों की चर्चा अब राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।
मुदीगुंटा गांव की इस सफलता के पीछे ‘मनरेगा’ (रोजगार गारंटी योजना) और ग्रामीणों की जागरूकता का बड़ा हाथ है। पिछले नौ वर्षों से चल रहे अभियानों के कारण गांव के 402 पंजीकृत परिवारों ने जल संरक्षण में गहरी रुचि दिखाई। योजना के तहत प्रति सोख्ता गड्ढा मिलने वाली ₹4,000 की वित्तीय सहायता ने श्रमिकों और ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया, जिससे निर्माण कार्यों में तेजी आई। व्यक्तिगत प्रयासों के साथ-साथ सामुदायिक सोख-गड्ढों और तालाबों के निर्माण ने गांव के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है। केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने भी प्रधानमंत्री के इस संबोधन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे तेलंगाना के जमीनी नायकों को विशेष पहचान मिली है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगा है। सात-आठ साल पहले की तुलना में गांव के भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे सिंचाई और पेयजल की समस्या दूर हुई है। इसके अलावा, सोख्ता गड्ढों के कारण रास्तों पर गंदा पानी जमा होना बंद हो गया है, जिससे मच्छरों के पनपने और बीमारियों के खतरे में कमी आई है। गांव से सटे वन क्षेत्र में ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के तहत बने तीन तालाब अब पानी से लबालब हैं, जो न केवल खेती में मदद कर रहे हैं बल्कि वन्य जीवों की प्यास बुझाने का भी प्रमुख स्रोत बन गए हैं।

