भक्ति, लोक और शास्त्रीय अभिव्यक्तियों का अद्भुत संगम

मैहर :श्री रामचंद्र पथ गमन न्यास, संस्कृति विभाग म.प्र. शासन द्वारा श्रीरामनवमी के पावन पर्व पर कलानुशा सनों में श्रीरामचंद्र की महिमा केन्द्रित आविर्भाव समारोह का आयोजन 27 मार्च 2026 को सायं 6.30 बजे से श्रीरामजानकी मंदिर बड़ा अखाड़ा मैहर में किया गया। जिला प्रशासन मैहर के सहयोग से आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में भारतीय जनमानस के आराध्य प्रभु श्रीरामचंद्र के आदर्श, करुणा, मर्यादा और लोकमंगलकारी स्वरूप को विविध कलानुशासनों के माध्यम से सजीव किया गया। श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के अनुपम संगम ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया।
समारोह का शुभारंभ रीवा की बघेली लोकगायिका सुश्री शिवानी पाण्डेय एवं उनके साथी कलाकारों की मधुर प्रस्तुति से हुआ। लोकधारा से ओत-प्रोत उनके गायन में अंचल की माटी की सोंधी सुगंध और भक्ति की आत्मीयता का सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर हुआ। उन्होंने देवीगीत आलरी निमिया के डाली, परी रेझूलना… से मंगलाचरण करते हुए श्रोताओं को भा वलोक में प्रवेश कराया। इसके पश्चात सोहर गीत धन धन नगर अयोध्या… नहछू गीत कोया न सगरा खनामम… बधाई गीत बाजी-बाजी रे बधड़यों बड़ी दूर…. परछन बियाही लाएँ रघुबर जानकी का…. चौती गीत खेलत राम, बोका इयाँ हो रामा… भगत गीत ऊंची मेडुलिया माँ मइया विराजी… गाकर अपनी वाणी को विराम दिया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में सुश्री सपनानामदेव दुबे एवं उनके दलद्वारा कथक शैली में प्रस्तुत श्रीरामकथा नृत्य नाटिकाने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नृत्य, अभिनय और भावाभिव्यक्ति के सशक्त संयोजन से सजी इस प्रस्तुति में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन प्रसंगों को सौंदर्यपूर्ण ढंग से मंचित किया गया। भये प्रकट कृपाला दीनदयाला… एवं ठुमक चलत रामचंद्र… जैसे पदों के माध्यम से बाल लीलाओं का मनोहारी चित्रण किया गया, जिसमें तीनों माताओं का वात्सल्य भाव अत्यंत मार्मिकरूप में अभिव्यक्त हुआ। कहरवा एवं रुपक ताल मेंनिबद्ध इस प्रस्तुति नेशास्त्रीयता और भावप्रवणताका सुंदर संतुलन प्रस्तुत किया।

द्वितीय चरण में पुष्पवाटिका प्रसंग को दादरा ताल में राम को देखकर श्री जनक नंदिनी… गीत पर अत्यंत कोमल भावों के साथ प्रस्तुत किया गया। इसके उपरांत स्वयंवर, धनुष भंग और राम-सीता विवाह के दृश्य श्री रघुवर कोमल कमल नयन… पद के माध्यम से भव्यता के साथ मंचित किया गया। कलाकारों ने भाव, मुद्रा और लय के सटीक संयोजन से इन प्रसंगों को जीवंत कर दिया। ऐसे राम हैं, दुःख हरण… गीत पर रूपक ताल में प्रस्तुति देकर राम के लोक मंगलकारी स्वरूप को उकेरा। नृत्य नाटिका में विविध पौराणिक प्रसंगों का समावेश करते हुए द्रोपदी चीरहरण, पांडव-कौरव संवाद, कृष्ण आगमन एवं गोवर्धन लीला जैसे दृश्य भी प्रस्तुत किए गए, जिससे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की समग्रता का आभास हुआ। समापन में तीनताल पर आधारित तराना, तोड़े, टुकड़ेएवं लड़ी की सशक्त प्रस्तुति ने दर्शकों को शास्त्रीय नृत्य की ऊँचाइयों का अनुभव कराया।

समारोह की अंतिम प्रस्तुति नर्मदापुरम् के सुप्रसिद्ध भजन गायक श्री आदित्य नारायण परसाई एवं उनके साथियों द्वारा दी गई, जिसमें भक्ति रस की अविरल धारा प्रवाहित हुई। उन्होंने भये प्रकट कृपाला दीनदयाला… से आरंभ करते हुए जन्म लिए रघुरैया…. अवध में आनंद भयो… और राम जैसा नगीना नहीं… जैसे गीतों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात रामजी की निकली सवारी….. श्री रामजी की सेना चली… एवं हर घर में बस एकही नाम जय श्रीराम… जैसे ऊर्जावान भजनों ने श्रोताओं में उत्साह का संचार किया। भक्ति की इस सरिता को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने देवी आराधना के गीत देवी गरबा…. काल के पंजे से माता बचाओ…. मन लेके आया… एवं पंखेिड़ा… प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिरस से परिपूर्ण कर दिया। अंत में श्रीराम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में……ये चमक ये दमक….जाके रटने सेमिले रघुवीर… एवं रामा-रामा रटते-रटते… जैसे लोकप्रिय भजनों के साथ-साथ श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों का सस्वर पाठकर उन्होंने अपनी प्रस्तुति को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान करते हुए समापन किया।

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