इंदौर:मांगलिया रेलवे ब्रिज का काम जल्द पूरा कराने की मांग को लेकर शनिवार को क्षेत्र के रहवासियों ने रेलवे ब्रिज संघर्ष समिति के बैनर तले सुबह से दोपहर तक धरना-प्रदर्शन किया. इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, किसान और स्थानीय लोग शामिल हुए और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई.मांगलिया क्षेत्र में अधूरे रेलवे ब्रिज को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया. संघर्ष समिति के नेतृत्व में सुबह से ही लोग एकत्रित हो गए और दोपहर की तेज धूप तक प्रदर्शन जारी रखा. अगरबत्ती फैक्ट्री में काम करने वाली बड़ी संख्या में महिलाएं भी प्रदर्शन में पहुंचीं. उन्होंने कहा कि ब्रिज का काम तीन साल से चल रहा है, लेकिन पिछले कई महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे रोजाना आने जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
प्रदर्शन के दौरान जनप्रतिनिधियों पर भी लोगों ने नाराजगी जताई. स्थानीय रहवासियों का कहना था कि जिन नेताओं को वर्षों से जिताते आ रहे हैं, वही अब ब्रिज निर्माण में देरी के मुद्दे पर चुप हैं और वे ठेकेदार कंपनी के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं. धरने में उन दो युवकों धीरज और संदीप के परिजन भी शामिल हुए, जिनकी मौत कुछ समय पहले मांगलिया व्यासखेड़ी रोड पर लगे भीषण जाम में फंसने के दौरान हार्ट अटैक से हो गई थी. परिजनों ने दोनों मृतकों के लिए एक एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग उठाई.
इंदौर-बुधनी रेलवे लाइन से प्रभावित किसानों ने मांगा चार गुना मुआवजा
इंदौर-बुधनी रेलवे लाइन से प्रभावित किसानों ने भी मंच से अपनी मांगें रखीं. किसानों ने कहा कि उन्हें बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए, जैसा अन्य परियोजनाओं में दिया है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे लाइन के ठेकेदार द्वारा सांवेर क्षेत्र में तालाबों में अवैध खनन किया जा रहा है. किसानों ने इस मामले में ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई और 10 गुना रॉयल्टी वसूलकर प्रभावित किसानों में बांटने की मांग की. संघर्ष समिति के हंसराज मंडलोई ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ब्रिज निर्माण की स्पष्ट डेडलाइन घोषित नहीं की गई और मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और बायपास जाम करने तक की स्थिति बन सकती है. धरना प्रदर्शन में क्षेत्र के कई किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में जल्द समाधान की मांग की.
