
ब्यावरा। लगातार बढ़ रही नगर की आबादी और सिकुड़ती जमीन ने अब नपा के समक्ष ही अपने बैठने का संकट पैदा कर दिया है. खुली जगह देखकर दुकान, कॉम्पलेक्स बनाने की नीति का यह दुष्परिणाम हुआ है कि न तो यातायात सुगम है और न नपा अपने लिये कोई स्थान चयन कर पा रही है. नपा ने अस्पताल रोड़ पर जिस जगह को अपने भवन के लिये प्रस्तावित बताया है वह शमशान की भूमि है.
गौरतलब है कि नपा ने करीब 6 माह पूर्व मटन मार्केट को विस्थापित करने के दौरान नदी के पुल के पार रिक्त पड़ी एक गड्ढे नुमा भूमि पर अपना बोर्ड लगा लिया है. नपा ने इस भूमि को अपने कार्यालय के लिये प्रस्तावित कर कार्यालय बनाया भी तो मटन मार्केट पर फिर लटकेगी तलवार..!
नगरपालिका ने इस भूमि को अपना घोषित कर यहां भवन बनाने का निर्णय ले लिया है. भूमि को लेकर क्या निर्णय होगा यह समय के गर्भ में है अगर नपा इस भूमि को प्राप्त करने में सफल हो जाती है और कार्यालय का निर्माण भी कर लेती है तो मटन मार्केट कार्यालय से बमुश्किल 50 फुट दूर होगा कार्यालय का संचालन और मटन मार्केट का वहां होना कितना व्यवहारिक रूप से बेहतर होगा यह समझा जा सकता है. इस आधार पर यह तय माना जा रहा है कि एक बार फिर मटन मार्केट फुटबाल बनेगा, मटन विक्रेताओं को फिर यह स्थान खाली करने को लेकर तलवार लटकी नजर आयेगी.
रखा है. इसी तारतम्य में नपा ने गत दिवस अपने बजट सम्मेलन में इस स्थान पर नया भवन बनाने का प्रस्ताव भी पारित कर लिया है. इसके लिये नपा आगामी दिनों में कोई कदम आगे बढ़ाते हुए नजर आयेगी.
आश्चर्य की बात यह है कि यह भूमि शमशान की भूमि है. शासकीय रिकार्ड में इसे मरघट की भूमि बताया गया है. एक ओर बात यह है कि यह भूमि निस्तार की है. नदी किनारे की इस शासकीय भूमि को पानी निकासी अर्थात निस्तार की भूमि कहा गया है. नपा को भवन बनाने के पहले भूमि प्राप्ति की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा
यद्यपि नपा को यह भूमि मिलना मुश्किल भरा काम नहीं है. लेकिन इस भूमि का प्रयोजन बदलना प्रशासन के लिये भी आसान नहीं होगा, हो सकता है नपा को इस भूमि की प्राप्ति के लिये सरकार तक का दरवाजा खटखटाना पड़े. इससे बड़ी बात यह है कि इस भूमि का चयन कितना उपयुक्त है कितना नहीं इसपर भी विचार किया जाना चाहिए,
मरघट की भूमि को सुरक्षित रखना जरूरी
अस्पताल रोड़ पर अजनार नदी का पुल पार करने के साथ ही सीधे हाथा नदी किनारे से लेकर मौनीपुरा के मुक्तिधाम तक की भूमि शासकीय रिका मरघट की भूमि है ब्यावरा नगर में यद्यपि तीन शमशान है इनमें राजगढ़ वाला सबसे बड़ा और सुविधाजनक है. ब्यावरा नगर का लगातार विस्तान रहा है. आने वाले समय में परिसीमन के कारण आसपास के गांवा नगरपालिका के हिस्सा होंगे इसके बाद गांवों की आबादी और तेजी ब्यावरा की और आयेगी ऐसे में अगर इस शमशान की भूमि को इसी प्रक के उपयोग के लिये सुरक्षित रखी जाए तो यह नगर की आने वाली पौढ़ लिये काफी उपयोगी होगा नगरपालिका अगर अपने कार्यालय भवन के अन्यत्र स्थान तय कर ले और यह भूमि मरघट अथवा इस प्रकार के कि अन्य प्रयोजन के लिये आरक्षित रख ले ती यह बेहतर निर्णय हो सकता है. नगर का शौभाग्य है कि ब्यावरा अजनार नदी के तट पर बसा है. नदीज दूषित और उपयोगी साबित नहीं हो रही है लेकिन कल अगर नदी सौंदर्यकरण पर शासन-प्रशासन, नपा ने ध्यान देते हुए नदी को खूबसूरत दिया तो नदी के तट पर एक और बेहतर, सुविधायुक्त मुक्तिधाम का निम्म कराया जा सकता है. यह भी नपा की नगर को देने वाली एक उपलब्धि हो
नपा ने अपने नये भवन के लिये जो भूमि प्रस्तावित की है वह अस्पताल रोड पर पुल के पार है. यह भूमि शासकीय रिकार्ड में किसको आरक्षित है, इसकी जानकारी हमें नहीं है. हम प्रशासन से इस संबंध में आवश्यक पत्र व्यहवार करेंगे इस संबंध में आगे का जो भी निर्णय लिया जायेगा वह जनप्रतिनिधियों और शासन प्रशासन के मार्गदर्शन से ही लिया जायेगा, नपा कार्यालय आवश्यकतानुसार छोटा है. परिषद, कर्मचारियों को बैठने तथा रिकार्ड रखने के लिये भी जगह कम पड़ती है ऐसे में हमें एक कार्यालय भवन की नितांत आवश्यकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए परिषद ने नवीन भवन का प्रस्ताव पारित किया है.
इकरार अहमद सीएमओ, नपा ब्यावरा
