ट्रंप ने सैन्य सहायता देने में आनाकानी के लिए नाटो के प्रति जताई निराशा, कहा- अमेरिका के बिना ‘कागजी शेर’

वॉशिंगटन, 28 मार्च (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो की आलोचना जारी रखते हुए इस पार-अटलांटिक सैन्य गुट के प्रति निराशा व्यक्त की है। श्री ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सैन्य सहायता प्रदान करने में सहयोगी देशों की अनिच्छा के लिए उन्हें कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे समुद्री ऊर्जा व्यापार, पारगमन और नौवहन प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ है। मियामी में सऊदी समर्थित निवेश सम्मेलन में श्री ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि एक बहुत बड़ी गलती तब हुई, जब नाटो वहां मौजूद नहीं था, वे बस वहां नहीं थे।”उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका नाटो की सुरक्षा पर ‘सालाना सैकड़ों अरब डॉलर’ खर्च कर रहा है। उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “और हम हमेशा उनके लिए वहां मौजूद रहते, लेकिन अब उनके कार्यों के आधार पर मुझे लगता है कि हमें होने की जरूरत नहीं है, है न? …अगर वे हमारे लिए वहां नहीं हैं, तो हम उनके लिए वहां क्यों हों। वे हमारे लिए वहां नहीं थे।”

अमेरिकी राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां गठबंधन की तीखी आलोचना के बाद आयी हैं। इसमें उन्होंने नाटो को ‘अमेरिका के बिना कागजी शेर’ करार दिया था। शुक्रवार को इस बयान को दोहराते हुए गठबंधन पर अमेरिका को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरानी नाकेबंदी के मद्देनजर नागरिक जहाजों के साथ जाने के लिए एक बहुराष्ट्रीय नौसेना एस्कॉर्ट समूह बनाने में नाटो ने मदद करने से इनकार कर दिया है। श्री ट्रंप ने नाटो के रुख पर निराशा जाहिर की, “मैंने हमेशा कहा है कि नाटो कागजी शेर है। और मैंने हमेशा कहा कि हम नाटो की मदद करते हैं, लेकिन वे कभी हमारी मदद नहीं करेंगे। और अगर कभी ‘बड़ी जंग’ छिड़ती है। हालांकि मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा, लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो मैं आपको गारंटी देता हूं, वे वहां नहीं होंगे।”

जब एक इंटरव्यू में नाटो के महासचिव मार्क रुटे से ‘कागजी शेर’ वाली टिप्पणी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप के साथ ‘कई दौर की बातचीत’ की थी।
श्री रुटे ने सीबीएस न्यूज से बात करते हुए कहा, “अच्छी खबर यह है कि देखिए, अमेरिका हफ्तों से ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की योजना बना रहा था। सुरक्षा और सुरक्षा कारणों से वे यूरोपीय सहयोगियों, दुनिया भर के देशों और भागीदार देशों के साथ साझा नहीं कर सकते थे कि वे क्या कर रहे हैं, क्योंकि इससे पहले हमले का असर खतरे में पड़ सकता था।” उन्होंने जोड़ा कि यह “तर्कसंगत बात थी कि यूरोपीय देशों को एक साथ आने के लिए कुछ हफ्तों की जरूरत थी।”

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