लिवर ट्रांसप्लांट से पहले मरीज की मौत, परिवार ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

इटारसी। अंगदान और लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में समय पर अनुमति न मिलने से एक मरीज की मौत का मामला सामने आया है। मृतक निलेश राठी लंबे समय से पेट से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। जांच के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट को ही एकमात्र विकल्प बताया था।

परिजनों के अनुसार, परिवार ने अंगदान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए लगातार प्रयास किए। पहले बेटे और पत्नी ने लिवर दान की इच्छा जताई, लेकिन वे चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त नहीं पाए गए। इसके बाद भतीजे ने अंगदान के लिए सहमति दी।

परिवार का कहना है कि ट्रांसप्लांट की अनुमति प्राप्त करने में देरी होती रही, जिससे इलाज आगे नहीं बढ़ सका। इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई और उन्हें इटारसी व नागपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अंततः 24 फरवरी 2026 को उनकी मृत्यु हो गई।

घटना के बाद परिजनों ने संबंधित प्रक्रिया में हुई देरी को गंभीर बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने अपनी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, संबंधित स्वास्थ्य विभागों और अन्य संस्थाओं को भेजते हुए आग्रह किया है कि ऐसी परिस्थितियों की समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

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