
विनय असाटी दमोह.जिले से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित हटरी गांव का प्रसिद्ध चौंसठ योगिनी माता धाम चैत्र नवरात्रि की नवमी पर एक बार फिर आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा.यहां आयोजित अनोखे जवारा विसर्जन को देखने के लिए न केवल दमोह बल्कि आसपास के जिलों से भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा.पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला.
नवमी के दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगना शुरू हो गई थी.भक्तजन विधि-विधान से स्थापित जवारे माता के चरणों में अर्पित करने पहुंचे. ढोल-नगाड़ों, जयकारों और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.
बुंदेली परंपरा का अनोखा रूप
हटरी में जवारा विसर्जन के दौरान बुंदेलखंड की प्राचीन परंपरा का विशेष रूप देखने को मिला. श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए शरीर में नुकीले बाना (लोहे की सुई) छिदवाते हैं.कई स्थानों पर एक ही बाना में दो से तीन भक्त गालों में छेदकर “भाव खेलते” नजर आए. इस दृश्य को देखकर उपस्थित लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं, वहीं श्रद्धालु इसे माता रानी की असीम कृपा और शक्ति का प्रतीक मानते हैं.
*दंडवत यात्रा से पहुंचे भक्त*
इस धार्मिक आयोजन की एक और विशेषता रही दंडवत यात्रा.सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मीलों दूर से दंडवत करते हुए माता के दरबार पहुंचे. कठिन तपस्या जैसी इस यात्रा में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल रहे, जो अपनी श्रद्धा और विश्वास का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते नजर आए.
*मन्नत पूरी होने पर अनुष्ठान*
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त इसी प्रकार बाना धारण कर, जवारे अर्पित कर और भाव खेलकर माता का आभार प्रकट करते हैं.यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है, जिसे आज भी पूरे श्रद्धा भाव के साथ निभाया जा रहा है.
भव्य चल समारोह ने खींचा ध्यान
जवारा विसर्जन के दौरान बड़े-बड़े बाना धारण किए श्रद्धालुओं के समूह ने चल समारोह निकाला, जिसमें एक-एक बाना में एक दर्जन तक लोग शामिल होकर भक्ति का प्रदर्शन करते नजर आए. यह दृश्य पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा.
*समापन*
हटरी स्थित चौंसठ योगिनी माता धाम में आयोजित यह अनोखा जवारा विसर्जन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि बुंदेलखंड की समृद्ध धार्मिक परंपराओं और लोकविश्वासों की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता है. हर वर्ष की तरह इस बार भी यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का विशेष केंद्र बना रहा.
