
इन्दौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद् की बैठक आज नालंदा परिसर में सम्पन्न हुई। विशेष बैठक में वर्ष 2026–27 के लिए ₹590 करोड़ का वार्षिक बजट पारित किया गया। बैठक में अधोसंरचना विकास, शैक्षणिक विस्तार, तकनीकी उन्नयन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
विश्वविद्यालय के अधोसंरचना विकास के अंतर्गत ग्रंथालय भवन निर्माण हेतु ₹2 करोड़, आवास निर्माण एवं विकास कार्य हेतु ₹2 करोड़, नालंदा एवं तक्षशिला परिसर में ड्रेनेज लाइन विकास हेतु ₹5 करोड़, डामर कंक्रीट सड़क निर्माण हेतु ₹2.5 करोड़ तथा नालंदा परिसर में नवीन प्रशासकीय भवन निर्माण हेतु ₹1.5 करोड़ स्वीकृत किए गए। इसके अलावा जीव विज्ञान अध्ययनशाला के ऑडिटोरियम की साज-सज्जा हेतु ₹75 लाख और ई-लाइब्रेरी स्थापना हेतु ₹50 लाख का प्रावधान भी किया गया है।
अन्य निर्माण एवं विस्तार कार्यों में कर्मचारियों के आवास हेतु ₹3.80 करोड़, आईईटी के दो ऑडिटोरियम हेतु ₹3 करोड़, तक्षशिला परिसर में लेक्चर हॉल थिएटर निर्माण हेतु ₹8 करोड़, प्रबंध संस्थान के नए भवन एवं ऑडिटोरियम हेतु ₹4 करोड़, आईआईपीएस भवन विस्तार हेतु ₹4 करोड़ तथा कॉमर्स अध्ययनशाला ऑडिटोरियम की साज-सज्जा हेतु ₹1.5 करोड़ स्वीकृत किए गए। साथ ही अर्थशास्त्र अध्ययनशाला में नए कक्ष निर्माण के लिए ₹2 करोड़ का बजट भी पारित हुआ।
तकनीकी उन्नयन के तहत आईईटी के लिए AI आधारित DOF आर्टिकुलेटेड रोबोट सेल (FMS सहित) खरीदने हेतु लगभग ₹39.80 लाख की मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं एवं प्रशासनिक कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लगभग ₹50 लाख स्वीकृत किए गए।
छात्र सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कन्या छात्रावासों में इन्सिनरेटर एवं वेंडिंग मशीन हेतु ₹16 लाख का प्रावधान किया गया। इसके साथ ही प्रवजन प्रमाण पत्र एवं ट्रांसक्रिप्ट के डिजिटलीकरण को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में शैक्षणिक पुनर्गठन के अंतर्गत गणित एवं सांख्यिकी अध्ययनशाला का विलय, योग अध्ययनशाला का शारीरिक शिक्षा में विलय, आजीवन शिक्षण अध्ययनशाला का दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र में विलय तथा सेंटर फॉर लॉजिस्टिक्स का स्कूल ऑफ एविएशन, टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी एंड मैनेजमेंट (साथम) में विलय प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
जनजातीय अध्ययनशाला के अंतर्गत एमबीए पाठ्यक्रम को 30 सीटों के साथ सत्र 2026–27 से प्रारंभ करने की स्वीकृति दी गई। इस पाठ्यक्रम के लिए 4 सहायक प्राध्यापक, 2 सह प्राध्यापक और 1 प्राध्यापक पद स्वीकृत किए गए। साथ ही आगामी सत्र से कई नए पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय भी लिया गया।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि जो महाविद्यालय शासन एवं विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उनका पुनः निरीक्षण किया जाएगा।
