भोपाल: प्रदेश में बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर सरकार और कंपनियां लागत बढ़ने का हवाला दे रही हैं, वहीं सस्ती सौर ऊर्जा के बढ़ते उत्पादन के बावजूद दरों में वृद्धि का प्रस्ताव सवालों के घेरे में है।पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में 10.19 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, जिसे लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जनसुनवाई पूरी कर ली है।
संकेत हैं कि अंतिम वृद्धि चार से पांच प्रतिशत के आसपास रह सकती है, जो एक अप्रैल से लागू हो सकती है।कंपनियों का तर्क है कि 6,043 करोड़ रुपये से अधिक के घाटे, पुराने प्रस्तावों की अस्वीकृति और स्मार्ट मीटर सहित अन्य खर्चों के कारण यह बढ़ोतरी जरूरी है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब सौर ऊर्जा तीन रुपये प्रति यूनिट से भी कम दर पर उपलब्ध है और प्रदेश में इसकी क्षमता 5,781 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, तो बिजली की कुल लागत में कमी दिखनी चाहिए।ऐसे में दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला माना जा रहा है, जिससे सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं कि बिजली सुधारों का भार जनता पर नहीं पड़ेगा।
