नयी दिल्ली, 26 मार्च (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) योजना के तहत बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में असम के एक अस्पताल के मालिक मोब्ज्जिल हुसैन बारभुइया की 55.33 लाख रुपये की अचल संपत्ति कुर्क की है। ईडी के गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने शिफा अस्पताल और अनुसंधान केंद्र के मालिक के खिलाफ हैलाकांडी थाने द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी। जांच में यह बात सामने आई है कि एबी-पीएमजेएवाई योजना के तहत सूचीबद्ध इस अस्पताल ने 22 अप्रैल 2019 से 5 नवंबर 2022 की अवधि के दौरान लाभार्थियों को कोई वास्तविक चिकित्सा उपचार प्रदान किए बिना 64,10,780 रुपये के 778 फर्जी प्रतिपूर्ति दावे प्रस्तुत किए थे। जांच में पता चला कि अस्पताल का जो पता दिया गया था वहाँ कोई अस्पताल था ही नहीं।
आरोपी ने कथित तौर पर एक व्यवस्थित धोखाधड़ी की योजना बनाई थी जिसमें आयुष्मान भारत कार्ड रखने वाले लाभार्थियों को एक अस्थायी सेटअप पर जाने के लिए प्रेरित किया गया था और 300 रुपये के मामूली भुगतान के बदले उन्हें अस्पताल के बिस्तरों पर लेटे हुए फोटो खिंचवाने के लिए कहा गया था। इन तस्वीरों को फिर ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (टीएमएस) पोर्टल पर अपलोड किया गया ताकि उन चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए फर्जी प्रतिपूर्ति दावे उत्पन्न किए जा सकें जो कभी की ही नहीं गई थीं। इन फर्जी दावों के बदले अटल अमृत अभियान सोसाइटी (राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, असम सरकार) द्वारा शिफा अस्पताल और अनुसंधान केंद्र के बैंक ऑफ इंडिया खाते में कुल 57.96 लाख रुपये जमा किए गए थे।
ईडी की जांच में यह स्थापित हुआ कि पीएमएलए, 2002 की धारा 2(1)(यू) के तहत ‘अपराध की कमाई’ को नकद निकासी और यूपीआई हस्तांतरण के माध्यम से व्यवस्थित रूप से निकाल लिया गया था। जांच में पता चला कि आरोपी ने धोखाधड़ी से प्राप्त इस राशि से पांच भूखंड खरीदे और दो बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कार्य शुरू किया। तदनुसार, ईडी ने 55.33 लाख रुपये मूल्य की छह अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, जिनमें पांच भूमि खंड और एक बहुमंजिला इमारत की एक मंजिल शामिल है।मामले की जांच जारी है।

