
ग्वालियर। शहर में लंबे समय से कचरा और सूखे पत्तों का उठाव नहीं होने के कारण अब लोग इन्हें जलाने पर मजबूर हो गए हैं। इन दिनों पेड़ों से बड़ी मात्रा में पत्ते झड़ रहे हैं, जो घरों और सड़कों के बाहर जमा हो रहे हैं। सफाई व्यवस्था सुचारू नहीं होने से ये पत्ते सड़कों पर पड़े रहते हैं। इससे परेशान होकर नागरिक इन्हें आग के हवाले कर रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। हालात यह है कि जब इन सूखे पत्तों को लोग नगर निगम की कचरा गाड़ियों में डालते हैं तो गाड़ी पर तैनात कर्मचारी पत्ते डालने से मना कर देते हैं। निगम कर्मचारी ही लोगों से इन पत्तों को जलाने की कह रहे हैं। शहर के सभी इलाकों में सड़कों के किनारे सूखे पत्तों के ढेर देखे जा सकते हैं।
पॉश कॉलोनियों से लेकर मुख्य मार्गों तक स्थिति एक जैसी बनी हुई है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण पत्तों का अंबार बढ़ता जा रहा है। लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
*प्रमुख स्थानों पर दिख रही लापरवाही*
शहर के प्रमुख और व्यस्त क्षेत्रों में भी सफाई व्यवस्था चरमराई हुई नजर आ रही है। डीडी मॉल के सामने चिड़ियाघर की दीवार के पास सूखे पत्तों का बड़ा ढेर लबे समय से जमा है। यहां हाल ही में नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा ही पत्तों में आग लगा दी गई थी, जिससे आसपास के क्षेत्र में धुआं फैल गया। इसी तरह गोपाल मंदिर क्षेत्र में भी सड़कों के दोनों ओर बड़ी मात्रा में पत्ते बिखरे पड़े हैं।
*धुएं से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याएं*
सूखे पत्तों को जलाने से उठने वाला धुआं कॉलोनियों में रहने वालों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी रोगियों को इससे अधिक दिक्कत हो रही है। कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि धुएं के कारण सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। हालात यह हैं कि कई मकानों में छोटे बच्चों के स्कूल चलते हैं। ऐसे में बच्चों को काफी परेशानी हो रही है।
*विशेषज्ञों की सलाहः पत्तों से बना सकते हैं खाद*
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सूखे पत्तों को जलाना न केवल प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि यह संसाधनों की भी बर्बादी है। इन पतों से जैविक खाद तैयार की जा सकती है, जो बागवानी और पौधों के लिए बेहद उपयोगी होती है। यदि नगर निगम इस दिशा में पहल करे, तो शहर के पार्कों और खाली स्थानों में गड्ढे बनाकर इन पत्तों से खाद तैयार की जा सकती है। लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम समय पर कचरा और पत्तों का उठाव करे, तो ऐसी स्थिति ही न बने। नियमित सफाई और उचित प्रबंधन के अभाव में लोग खुद ही पत्तों को जलाने का रास्ता अपना रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए घातक है।
