
भोपाल। राजधानी में एक बार फिर शिक्षक अभ्यर्थीं मंगलवार को सड़कों पर उतर आये. टी टी नगर स्थित अंबेडकर पार्क में प्रदेशभर से आए वर्ग 2 और वर्ग 3 के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों इस बार अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस बार जब तक पद वृद्धि नहीं होती, प्रदर्शन जारी रहेगा. हैरानी की बात यह है कि विधानसभा में खुद सरकार ने माना है कि एक लाख से ज्यादा शिक्षक पद खाली हैं। वहीं यूआईडीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक सैकड़ों स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। इसके बावजूद भर्ती में नाम मात्र के पद निकलने से नाराज अभ्यर्थी मंगलवार को सीधे मुख्यमंत्री से मिलने की मांग पर अड़े लगे रहे। इस बीच अभ्यर्थियों के झुंड ने पॉलीटेक्निक चौराहे पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव भी किया.
क्या है पूरा मामला
माध्यमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदों की संख्या बेहद सीमित रखी गई। प्राथमिक में 13089 और माध्यमिक में करीब 10800 पद ही घोषित किए गए। जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार लाखों पद खाली हैं। वहीं आरक्षण और होल्ड प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अच्छे अंक लाने के बावजूद चयन से बाहर हो गए।
अभ्यर्थियों की मांगें
अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग 3 में कम से कम 25000 पद किए जाएं। वर्ग 2 में प्रत्येक विषय में 3000 पद बढ़ाए जाएं या कुल पद 10000 किए जाएं। साथ ही विशेष शिक्षक के 3200 पद अलग से भर्ती में शामिल किए जाएं।
अभ्यर्थियों की जुबानी दर्द-
स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, बच्चे पढ़ाई से वंचित हैं। पद बढ़ेंगे तभी शिक्षा सुधरेगी। अब भी पद नहीं बढ़े तो ये मोहन सरकार की नाकामी और ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था की निशानी होगी।
अंकित कुमार द्विवेदी, अभ्यर्थी
हिंदी विषय में 99 पर्सेंटाइल लाने के बाद वेटिंग में भी जगह नहीं मिली। इतनी मेहनत के बाद अब मानसिक स्थिति खराब हो चुकी है, पद वृद्धि ही आखिरी उम्मीद है। ये नहीं हुआ तो हमारी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं।
संजिदा, अभ्यर्थी
परीक्षा में 95 पर्सेंटाइल हासिल किए हैं फिर भी चयन नहीं हुआ। बार बार प्रदर्शन के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही. इस बर जब तक पद वृद्धि का निर्णय नहीं आ जाता हम ऐसे ही बैठे रहेंगे।
धनसिंह बड़ोले, अभ्यर्थी
तीन साल से तैयारी की, पढ़ाई के लिए कर्ज भी लिया। इसके बाद 98 पर्सेंटाइल लाने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। अब उम्र निकल रही है, परिवार पर बढ़ता बोझ देख लगता है जान दे दूं।
शिवराज जाटव, अभ्यर्थी
