नयी दिल्ली, 23 मार्च (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने घर खरीदने वालों और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में भारती बिल्डर्स, उसके साझेदारों, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों की 17.97 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं।
ईडी के अनुसार उसने तेलंगाना में साइबराबाद के आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथामिकी के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) जांच शुरू की। यह प्राथमिकी मुल्पुरी शिवराम कृष्ण, दुपाती नागा राजू, डोड्डाकुला नरसिम्हा राव उर्फ पोन्नारी और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860 की धारा 406 और 420, और तेलंगाना वित्तीय संस्थानों में जमाकर्ताओं के संरक्षण अधिनियम की धारा पांच के तहत दर्ज की गई थी। इन लोगों पर कथित तौर पर भारती बिल्डर्स द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं में घर खरीदने वालों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है।
ईडी के मुताबिक जांच में पता चला कि भारती बिल्डर्स के प्रबंध भागीदार मुल्पुरी शिवराम कृष्ण ने, दुपाती नागा राजू के साथ मिलकर भारती लेक व्यू टावर्स परियोजना के लिए एक प्री-लॉन्च स्कीम शुरू की थी, जिसके तहत 450 से ज़्यादा घर खरीदारों को बड़ी रकम देने के लिए लुभाया गया। आरोपियों ने कथित तौर पर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी वाले समझौता ज्ञापन किये, जिसमें उन्होंने परियोजना पूरा होने का भरोसा दिलाया, जबकि यह बात छिपाई कि उन्हें ज़रूरी सरकारी मंज़ूरियां नहीं मिली थीं और ज़मीन पहले से ही कर्ज़ के बदले गिरवी रखी हुई थी। कंपनी और प्रमोटरों की देनदारियों को भी घर खरीदारों से छिपाकर रखा गया था।
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने घर खरीदारों से मिली अग्रिम राशि के ज़रिए करीब 75 करोड़ रुपये की आपराधिक कमाई की, जिसमें से 17 करोड़ रुपये नकद में जमा किए गए थे। परियोजना को पूरा करने के बजाय, इन पैसों को कथित तौर पर देनदारियों को चुकाने, एडवांस पर ब्याज़ देने, अचल संपत्तियों में निवेश करने, बैंकिंग फंड को नकद में बदलने के लिए कमीशन देने और अन्य गैर-ज़रूरी कामों में लगा दिया गया। परियोजना के लिए खरीदी गई ज़मीन के कुछ टुकड़ों को ऐसे लोगों को बेच दिया गया जिनका परियोजना से कोई लेना-देना नहीं था, जबकि घर खरीदारों से अभी भी अग्रिम राशि मांगी जा रही थी। इस मामले में आगे की जांच जारी है।
