जबलपुर: मध्य प्रदेश शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व उप निदेशक, जगदीश प्रसाद सरवटे के विरुद्ध अपराध से आय अर्जित करने के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम 2002 के तहत विशेष न्यायालय पीएमएलए जबलपुर के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल ने चालान पेश किया है। ईडी ने सरवटे के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की थी। न्यायालय के पूर्व आदेश पर जगदीश सरवटे हाजिर हुए। कोर्ट ने अभियोजन शिकायत और अन्य दस्तावेज की प्रति उन्हें देने के निर्देश दिये है।
दरअसल, ईडी ने आर्थिक अपराध विंग जबलपुर द्वारा भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। सरवटे पर आरोप है कि उन्होंने एक लोक सेवक के रूप में कार्य करते हुए एक जनवरी 2015 से 20 जून 2025 की अवधि के दौरान अपनी आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात से अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच के दौरान यह पता चला कि आरोपी ने भ्रष्ट तरीकों से अपराध से अर्जित आय उत्पन्न की थी और बाद में अवैध नगदी को बैंकिंग प्रणाली में डालकर भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी जिलों में स्थित कई अचल संपत्तियों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को खरीदने में निवेश किया।
ईडी ने कुल 11.81 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय की पहचान की है, जो उन संपत्तियों का मूल्य दर्शाती है, जिनमें अवैध धन का निवेश किया गया था। फरवरी 2026 में समतुल्य मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया था। ईडी ने जांच में यह स्थापित किया है कि जगदीश प्रसाद सरवटे ने जानबूझकर अपराध से अर्जित आय को अर्जित किया, जिसे अपने कब्जे में रखा, छिपाया और उसका उपयोग किया तथा उसे बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया।
