सूरगांव: जहां उगता है आस्था का सूर्य और महकती है सब्जियों की क्यारियां

बैतूल: बैतूल जिले का छोटा सा ग्राम सूरगांव अपनी अनोखी पहचान के कारण चर्चा में है।जिला मुख्यालय से महज 7-8 किलोमीटर दूर आठनेर मार्ग पर स्थित यह गांव जहां एक ओर सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यहां स्थित करीब 100 साल पुराना सूर्य मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।करीब 2000 की आबादी वाले इस गांव की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। पारंपरिक फसलों के साथ यहां के किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

गांव में कुल लगभग 700 एकड़ कृषि भूमि में से 300 से 400 एकड़ क्षेत्र में गोभी, टमाटर, पालक, गाजर सहित अन्य सब्जियां उगाई जाती हैं। किसान आधुनिक खेती तकनीकों के साथ पारंपरिक अनुभव का उपयोग कर बेहतर उत्पादन ले रहे हैं।स्थानीय किसान हेमराज बाड़बूदे के अनुसार, सूरगांव की सब्जियां केवल बैतूल मंडी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सारनी, इटारसी के साथ-साथ महाराष्ट्र के बाजारों में भी इनकी अच्छी मांग है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं और उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।

गांव की शिक्षा व्यवस्था भी संतोषजनक है। यहां दसवीं तक सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और निजी स्कूल उपलब्ध हैं। हालांकि उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को बैतूल और सेहरा जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। गांव की साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत बताई जाती है, जो ग्रामीण क्षेत्र के लिहाज से सकारात्मक संकेत है।सूरगांव की एक और खास पहचान यहां स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर है। ग्रामीणों के अनुसार, यह मंदिर करीब एक सदी पुराना है और इसकी विशेषता यह है कि यहां सबसे पहले सूर्य की किरणें पड़ती हैं। इसी कारण इसे ‘सूर्य मंदिर’ के नाम से जाना जाता है। समय के साथ मंदिर जर्जर हो गया था, लेकिन हाल ही में ग्रामीणों ने जनसहयोग से इसका जीर्णोद्धार कर इसे नया स्वरूप दिया है।आज यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी बन चुका है।

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