भोपाल। अशोका गार्डन स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री 108 विद्यासागर महा मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री 108 निर्वेग सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में हो रही धर्म की प्रभावना। मीडिया प्रभारी अशोक जैन सारणी ने बताया कि मुनि श्री के मुखारविंद से शांति धारा का वाचन किया गया तदोपरांत मुनि श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि व्यक्ति का मन हमेशा दूसरों के बारे में सोचता है अपने विषय में कभी नहीं सोचता इसीलिए हमेशा मन तनाव में रहता है यदि मन अपने विषय में सोचने लगे तो तनाव रहेगा ही नहीं तनाव कम करने के लिए हम मंत्रो का सहारा लेते हैं मंत्र 35 अक्षर 16 अक्षर इसी प्रकार 5, 6, 2, 1 अक्षर वाला मंत्र भी होता है गुरुदेव के मुख से भी जो उपदेश मिलता है वह भी ध्यान करने योग्य होता है स्वर्ग नरक कहां पर है यह भी अपने परिणामों पर निर्भर करता है एक प्रयास जरुर करना चाहिए कि सामने वाला सुधार जावे यदि नहीं सुधरता तो उसे भगवान भरोसे छोड़ देना चाहिए उसे ज्यादा सुधारने की आवश्यकता नहीं है उसका पाप पुण्य उसके साथ और अपना पाप पुण्य अपने साथ फिर अपने विषय में ज्यादा सोचना चाहिए तभी हम तनाव मुक्त रह सकेंगे।
