भोपाल: नगर निगम भोपाल में करीब 1100 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण वर्षों से लंबित है और अब यह मुद्दा एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है. वर्ष 1998 से शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया के तहत इन कर्मचारियों को जरूरत के अनुसार काम पर रखा गया था, इधर,स्थायी कर्मचारी सेवानिवृत्त होते गए और काम प्रभावित होने लगा. समय के साथ इन कर्मचारियों ने निगम की व्यवस्था को संभाले रखा, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में कर्मचारी नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं.
इनमें से कई कर्मचारियों की सेवा के 25 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है. हालांकि उन्हें विनियमित कर स्थाई कर्मी का दर्जा दिया गया, लेकिन पूर्ण रूप से नियमित नहीं किया गया। वर्ष 2018 में केवल 11 कर्मचारियों को नियमित किया गया था, जिनमें लिपिक वर्ग और उपयंत्री शामिल थे. नियमितीकरण की मांग को लेकर कुछ कर्मचारी न्यायालय की शरण में भी पहुंच चुके हैं, जबकि कई कर्मचारी इंतजार करते-करते सेवानिवृत्त हो गए और कुछ की सेवा के दौरान ही मृत्यु हो गई.
वेतन में भारी असमानता, काम एक जैसा
नगर निगम में कार्यरत स्थाई और नियमित कर्मचारियों के बीच वेतन को लेकर बड़ा अंतर बना हुआ है. दोनों ही वर्ग समान कार्य कर रहे हैं, लेकिन स्थाई कर्मचारियों को पीएफ कटौती के बाद करीब 18 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता है. उन्हें कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रेणी के आधार पर भुगतान किया जा रहा है, जबकि नियमित कर्मचारियों को लगभग दोगुना वेतन मिलता है. इस असमानता को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
सुविधाओं से वंचित स्थाई कर्मचारी
जहां नियमित कर्मचारियों को एरियर, महंगाई भत्ता, बीमा, ग्रेच्युटी, पदोन्नति और समयमान वेतनमान जैसी सुविधाएं मिलती हैं, वहीं स्थाई कर्मचारी इन सभी लाभों से वंचित हैं. समान कार्य के बावजूद इस भेदभाव से कर्मचारियों में हीन भावना पनप रही है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
नियमितीकरण का अधिकार होने के बावजूद कार्रवाई नहीं
वर्ष 2020 में शासन ने नगर निगम आयुक्त को नियमितीकरण के लिए पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिए थे, लेकिन इसके बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर इच्छाशक्ति की कमी के चलते मामला लंबित है.
चुनावी वादे भी अधूरे
तीन साल पहले हुए नगर निगम चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने कर्मचारियों की समस्याओं को प्राथमिकता देने और नियमितीकरण का आश्वासन दिया था. महापौर मालती राय ने भी इस संबंध में वादा किया था, लेकिन उनका कार्यकाल समाप्ति की ओर है और कर्मचारी अब भी उसी स्थिति में खड़े हैं. इसे लेकर कर्मचारियों में वादाखिलाफी की भावना गहराती जा रही है.
परिषद बैठक से पहले हलचल तेज
सूत्रों के मुताबिक 23 मार्च को होने वाली परिषद बैठक से पहले इस मुद्दे पर हलचल तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि कर्मचारी नेता और पदाधिकारियों को चर्चा के लिए बुलाया गया है, ताकि बैठक के दौरान संभावित प्रदर्शन को रोका जा सके. साथ ही, एक बार फिर नियमितीकरण को लेकर आश्वासन देने की तैयारी भी की जा रही है. हालांकि कर्मचारी अब ठोस निर्णय की मांग पर अड़े हुए हैं और केवल आश्वासन से संतुष्ट होने के मूड में नहीं दिख रहे.
इनका कहना है.
नियमितिकरण के लिए कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं. हम शासन को पत्र लिखेंगे. वहां से जो भी आदेश होंगे उसके पालन में नियमितिकरण की प्रकिया की जाएगी. मैं अपने कार्यकाल में सभी के नियमितिकरण का कार्य करुंगी.
मालती राय, महापौर नगर निगम भोपाल
इन्हें अपने घोषण पत्र को पढ़ना चाहिए. और जो वादे किए थे उनको पूरा करना चाहिए. लोगों ने इन्हें घोषणा पत्र पर चुना था. किसी भी दल का हो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि उसे अपना घोषणा पत्र पूरा करना चाहिए.
विभा पटेल, कांग्रेस नेत्री एवं पूर्व महापौर, नगर निगम भोपाल
नगर निगम चुनाव के दौरान वादा किया था कि सभी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा. उन्होंने इस घोषणा का प्रेस नोट भी जारी हुआ था. अब वादे से मुकरा जा रहा हैं. इसलिए तीन साल बाद भी वादा पूरा नहीं हुआ है.
अशोक वर्मा, कर्मचारी नेता नगर निगम भोपाल
