छतरपुर: छतरपुर जिले में बीती रात कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया कि अन्नदाता की आँखों में आँसू आ गए। शुक्रवार की देर शाम आसमान में छाई काली घटाओं और तूफानी हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। जो फसलें कटने की दहलीज पर थीं और खलिहानों में पहुँचने का इंतजार कर रही थीं, वे अब खेतों में पानी-पानी हो गई हैं।
खेतों में ‘काल’ बनकर बरसे मेघ
शुक्रवार शाम करीब 2 घंटे तक हुई निरंतर बारिश ने जिले के लवकुशनगर, बिजावर, राजनगर, खजुराहो और छतरपुर तहसील के ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचाई है। पठापुर, देरी, कालापानी, बरदोआह, कर्री, विक्रमपुर और धोरी सहित दर्जनों गाँवों में फसलें पूरी तरह भीग चुकी हैं। वर्तमान में गेहूं, चना और सरसों की फसलें पककर तैयार थीं, लेकिन प्रकृति की इस मार ने अब किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
किसानों का छलका दर्द
क्षेत्र के किसान मुन्ना अहिरवार ने भर्राई आवाज में बताया, “गेहूं की बालियां भीगने के बाद अब काली पड़ जाएंगी। इससे न केवल अनाज का वजन कम होगा, बल्कि बाजार में सही दाम भी नहीं मिलेगा। खेतों में कटा रखा सरसों और चना भी बर्बाद हो गया है।” किसानों का कहना है कि यह बारिश उनकी सालभर की कमाई पर ‘वज्रपात’ की तरह है।
कृषि विभाग के आंकड़े
छतरपुर जिले के कृषि विभाग के उपसंचालक अनिल कुमार मिश्रा के अनुसार, इस बार जिले में रिकॉर्ड 3 लाख 80 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई थी, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक थी। बेहतर पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को इस बेमौसम बारिश ने गहरे सदमे में डाल दिया है। जिले के कई हिस्सों में कटी हुई फसलें खेतों में ही तैरती नजर आईं, जिससे भारी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
