मुख्य चुनावी राज्यों में ईवीएम-वीवीपीएटी के रैंडमाइजेशन का प्रथम चरण संपन्न

नयी दिल्ली, 21 मार्च (वार्ता) चुनाव आयोग ने असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और ‘वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपीएटी) इकाइयों के ‘रैंडमाइजेशन’ का पहला चरण पूरा कर लिया है।

चुनाव आयोग ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी।‎

विज्ञप्ति के मुताबिक ईवीएम का आवंटन पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक सख्त दो-स्तरीय रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के तहत किया जाता है। प्रथम चरण में ईवीएम को जिला स्तरीय गोदामों से विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में तथा दूसरे चरण में उन्हें निर्वाचन क्षेत्र स्तर से व्यक्तिगत मतदान केंद्रों के लिए फिर से रैंडमाइज किया जाता है।”

‎चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारियों को केवल उन मशीनों के लिए प्रथम दौर का रैंडमाइजेशन पूरा करना था, जिन्होंने सफलतापूर्वक ‘प्रथम स्तर की जांच’ (पूरी कर ली थी। यह प्रक्रिया अब न केवल तीन चुनावी क्षेत्रों में, बल्कि गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में होने वाले उपचुनावों के लिए भी पूरी हो गई है, जहाँ 9 अप्रैल को मतदान होना है।

‎अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह रैंडमाइजेशन मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘ईवीएम प्रबंधन प्रणाली’ का उपयोग करके किया गया था। वक्तव्य में कहा गया, “चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ पूरी कवायद पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई।”

प्रथम चरण के पूरा होने के बाद, रैंडमाइज की गई मशीनों की निर्वाचन क्षेत्रवार सूची जिला मुख्यालयों पर पार्टी प्रतिनिधियों के साथ साझा की गई है। इन मशीनों को अब विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर निर्धारित ‘सुरक्षित कक्षों’ में रखा जाएगा, जो फिर से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की निगरानी में रहेंगे।

‎आयोग ने आगे कहा कि एक बार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची अंतिम रूप ले लेने के बाद, रैंडमाइजेशन के पहले और दूसरे दोनों चरणों की विस्तृत जानकारी सभी उम्मीदवारों के साथ भी साझा की जाएगी। यह बहु-स्तरीय रैंडमाइजेशन प्रक्रिया भारतीय चुनावी प्रणाली में अंतर्निहित एक प्रमुख सुरक्षा उपाय है, जो किसी भी संभावित हेरफेर को रोकने और मतदान से पहले सभी पक्षों के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए बनाई गई है।

 

 

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