चेक बाउंस मामले में नोटिस के साथ समय प्रदान करना आवश्यक, न्यायालय ने किया दोषमुक्त

जबलपुर। जबलपुर के न्यायालय ने 6 लाख रुपये के बाउंस चेक मामले में फैसला सुनाया गया, जिसमें अभियुक्त आलोक अग्रवाल को सेक्शन 138 के तहत दोषमुक्त कर दिया गया। परिवादी हर्षित समैया का आरोप था कि अभियुक्त ने 10 नवंबर 2020 को 6 लाख रुपये का चेक जारी किया, जिसे बैंक में जमा करने पर अपर्याप्त निधि के कारण भुगतान नहीं हुआ। परिवादी ने इस मामले में न्यायालय में अपनी शिकायत दर्ज करवाई और अपने समर्थन में स्वयं साक्षी बने, साथ ही बैंक साक्षी अतुल गौतम को भी पेश किया। अभियुक्त के पक्ष में अधिवक्ता अभिषेक पटेल पैरवी कर रहे थे।

न्यायालय ने देखा कि परिवादी द्वारा नोटिस भेजने और 30 दिन के भीतर चेक राशि मांगने का ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। बचाव पक्ष ने कहा कि चेक केवल कोरा था और असली लेन-देन नहीं हुआ, लेकिन इस बात का समर्थन करने के लिए कोई दस्तावेज या साक्ष्य नहीं पेश किया। सभी मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने यह तय किया कि चेक जरूर जारी हुआ था, लेकिन नोटिस और मांग की प्रक्रिया का पर्याप्त प्रमाण न होने के कारण अभियुक्त को सेक्शन 138 के तहत दोषमुक्त करना उचित है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चेक जारी होना साबित हो गया, लेकिन नोटिस भेजने और समय पर मांग करने का अभाव अभियुक्त को राहत देने का कारण बना।

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