तेल अवीव, 20 मार्च (वार्ता) ईरान के दक्षिणी पार्स गैस क्षेत्र पर इजरायल के हमले से पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत की थी या नहीं, इसे लेकर परस्पर विरोधी बयानों के बीच श्री नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने स्वतंत्र रूप से कार्रवाई की है।
श्री नेतन्याहू ने कहा, “तथ्य नंबर एक, इजरायल ने असलूयेह गैस परिसर पर अकेले कार्रवाई की। तथ्य नंबर दो, श्री ट्रंप ने हमें भविष्य में ऐसे हमले नहीं करने के लिए कहा और हम रुके हुए हैं।”
श्री ट्रंप ने पहले कहा था कि हमले के संबंध में अमेरिका के साथ समन्वय नहीं किया गया था और संकेत दिया था कि इजरायल ईरानी गैस बुनियादी ढांचे पर आगे के हमलों से बचेगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने खाड़ी ऊर्जा स्थलों को निशाना बनाना जारी रखा तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है।
बाद में श्री ट्रंप ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से श्री नेतन्याहू को तेल और गैस सुविधाओं पर हमला न करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा, ऐसा मत करो, और वह ऐसा नहीं करेंगे।”
अमेरिकी अधिकारियों ने ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ को बताया कि उन्हें इस ऑपरेशन के बारे में काफी पहले से पता था और यह अच्छी तरह से नियोजित और समन्वित था।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हमले को ‘एक चेतावनी’ बताया और ईरान से ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अपने जवाबी हमले रोकने का आग्रह किया।
यह बयान महत्वपूर्ण ऊर्जा संपत्तियों पर बढ़ते हमलों के बीच आया है। ‘कतरएनर्जी’ के अनुसार, दक्षिण पार्स हमले के बाद, ईरान ने कतर के रास लफान गैस हब पर हमलों सहित खाड़ी देशों के लक्ष्यों पर ड्रोन और मिसाइलों से कई हमले किये। सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत के ऊपर भी ड्रोन को रोका गया।
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों की आवाजाही को भी प्रभावी ढंग से रोक दिया है, जिससे व्यापक आर्थिक व्यवधान की आशंका बढ़ गई है।
श्री नेतन्याहू ने इस आलोचना को खारिज करते हुए कि उन्होंने अमेरिका को संघर्ष में घसीटा है, कहा, “क्या वास्तव में कोई सोचता है कि कोई श्री ट्रंप को बता सकता है कि क्या करना है? ज़रा सोचिए। वह हमेशा अपने फैसले इस आधार पर लेते हैं कि उनके अनुसार अमेरिका के लिए क्या अच्छा है।”
युद्ध की मानवीय क्षति को स्वीकार करते हुए, इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने भाई योनातन नेतन्याहू का संदर्भ दिया, जो 1976 के एंटेबे ऑपरेशन के दौरान मारे गए थे। उन्होंने इजरायली और अमेरिकी परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “सैनिकों का खोना दर्दनाक है… शोक संतप्त परिवारों के लिए इसकी कीमत बहुत बड़ी है।”
श्री नेतन्याहू ने अमेरिकी सहयोगी के रूप में इजरायल की भूमिका का बचाव करते हुए कहा कि दोनों देशों का उद्देश्य ईरान को परमाणु क्षमता विकसित करने से रोकना है। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी ही इस विनाशकारी विकास से बचने का एकमात्र तरीका है। मैंने किसी को गुमराह नहीं किया।”
इजरायली प्रधानमंत्री ने दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्यों की ओर भी इशारा किया, जिसमें वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग विकसित करना शामिल है, जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब जैसे चोकपॉइंट्स से बचते हों। प्रस्तावों में अरब प्रायद्वीप से इजरायल के भूमध्यसागरीय बंदरगाहों तक पाइपलाइनें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह ‘चोकप्वाइंट्स को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है’ और क्षेत्रीय ऊर्जा प्रवाह को नया आकार दे सकता है।
श्री नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध व्यापक रूप से अनुमानित समय से पहले समाप्त हो जाएगा।
