
नई दिल्ली। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) द्वारा जारी उस निर्देश पर कड़ा विरोध जताया है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) लागू करने को कहा गया है।
प्रेस को जारी बयान में यूएफबीयू ने कहा कि 18 मार्च को जारी यह निर्देश समय से पहले लिया गया कदम है, क्योंकि यह मुद्दा अभी मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष सुलह प्रक्रिया में लंबित है। 9 मार्च को हुई बैठक में यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था कि वरिष्ठ अधिकारियों के लिए पीएलआई पर चर्चा जारी है और आगे की कार्रवाई स्थापित परामर्श प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
यूनियन का कहना है कि यह एकतरफा फैसला बैंकिंग क्षेत्र में दशकों से चली आ रही द्विपक्षीय औद्योगिक संबंध व्यवस्था को कमजोर करता है। साथ ही यह उन मौजूदा समझौतों की अनदेखी करता है, जिनमें प्रोत्साहन राशि को बैंक के समग्र प्रदर्शन से समान रूप से जोड़ा गया है।
यूएफबीयू ने यह भी कहा कि नई योजना में व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन लागू करने से कर्मचारियों के बीच विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है और सामूहिक एकता प्रभावित होगी।
वित्तीय पहलुओं पर चिंता जताते हुए यूएफबीयू ने कहा कि जहां वर्तमान व्यवस्था में अधिकतम 15 दिन के मूल वेतन और महंगाई भत्ते तक प्रोत्साहन सीमित है, वहीं नई योजना में 365 दिन के मूल वेतन तक प्रोत्साहन का प्रावधान है, जिससे खर्च में भारी वृद्धि होगी।
यूएफबीयू ने मांग की है कि इस निर्देश को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और मामले का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए।
