कोलकाता, 20 मार्च (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग पर चुनावों से पहले राज्य में लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए एक ‘गहरी साजिश’ रचने का आरोप लगाया।
सुश्री बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का घोषणापत्र जारी करने से पहले कालीघाट स्थित अपने आवास से आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा के इशारे पर शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का तबादला किया। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में स्थिति ‘घोषित राष्ट्रपति शासन’ के बराबर है, जिसे बिना औपचारिक घोषणा के लगाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह अघोषित नहीं, घोषित राष्ट्रपति शासन है। यह शर्मनाक है कि चुनाव इस तरह कराए जा रहे हैं। इतना डर क्यों है?” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि पश्चिम बंगाल एक मजबूत और विशिष्ट राज्य के रूप में बना रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर निशाना बनाते हुए सुश्री बनर्जी ने दोनों पर चुनावों को प्रभावित करने के लिए ऐसी स्थिति तैयार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “बंगाल ने हमेशा वर्चस्व का विरोध किया है। यहां तक कि औपनिवेशिक शासन के दौरान भी अंग्रेजों ने अपनी राजधानी कोलकाता से स्थानांतरित कर दी थी क्योंकि वे इस क्षेत्र के लोगों से डरते थे।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “वे समझ गए थे कि बंगालियों को दबाया नहीं जा सकता। आज भी, बंगाल को उसकी भाषा, पहचान और बौद्धिकता के लिए निशाना बनाया जा रहा है। राज्य की वैश्विक बौद्धिक उपस्थिति इसे ईर्ष्यालु शक्तियों का निशाना बनाती है।”
सुश्री बनर्जी ने देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं के पूरी तरह से ठप होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया, “व्यवहार में कोई कानून, कोई संविधान नहीं है। लोग न्याय के लिए कहां जाएंगे? संस्थाओं को खरीद लिया गया है, चाहे डर के जरिए या लालच के जरिए।” उन्होंने दावा किया कि श्री मोदी को सत्ता से हटाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है।
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर भाजपा के ‘मुखपत्र’ के रूप में कार्य करने का भी आरोप लगाया और चेतावनी दी कि बंगाल की संस्कृति और प्रशासन से अपरिचित अधिकारियों को लाने से चुनावी प्रक्रिया अस्थिर हो सकती है। उन्होंने कहा, “बाहर के लोग बंगाल, इसके समाज, इसके त्योहारों, इसकी संवेदनशीलता को नहीं समझते हैं। अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार होगी।”
सुश्री बनर्जी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों के स्थानांतरण की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य के अधिकारियों को हटाने से शासन व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाएगी। उन्होंने हिंसा भड़काने लिए अवैध धन, हथियारों और माफियाओं को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्रीय हस्तक्षेप का आरोप लगया।
मुख्यमंत्री ने हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन समुदायों के बीच एकता का आह्वान करते हुए मतदाताओं से भाजपा की ‘डर और प्रलोभन की राजनीति’ को खारिज करने का आग्रह किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर नागरिकों को डराने, असंतोष को दबाने और मीडिया को नियंत्रित करने के लिए एजेंसियों का उपयोग करने का आरोप लगाया।
सुश्री बनर्जी ने कहा, “यह साजिश पिछली सभी साजिशों से बढ़कर है, लेकिन अंततः जनता की जीत होगी।”
