यरुशलम/तेहरान | अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के आज 21वें दिन संघर्ष और अधिक हिंसक हो गया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा ईरान के सैन्य आधार को ‘बुरी तरह खत्म’ करने के ऐलान के ठीक बाद, तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। गुरुवार देर रात यरुशलम के आसमान में एक के बाद एक कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरा शहर दहल उठा और एयर रेड सायरन गूंजने लगे। इस बीच, लेबनान के दक्षिणी शहरों पर इजराइली जेट विमानों ने ताबड़तोड़ हमले किए हैं, जिससे इस युद्ध के पूरे पश्चिम एशिया में फैलने का खतरा और गहरा गया है।
युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक भी पहुंचने लगी है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने कुवैत स्थित तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया है, जिसके कारण वहां भीषण आग लग गई है। इस घटना ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान समर्थित समूहों और इजराइली सेना के बीच जारी इस सीधी जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा केंद्रों पर हमले जारी रहे, तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में ईंधन का भारी संकट पैदा हो सकता है।
इस युद्ध में अमेरिका की सक्रिय भागीदारी को लेकर वहां के घरेलू मोर्चे पर तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ‘MAGA’ समर्थकों को छोड़कर, लगभग सभी राजनीतिक दलों के अमेरिकियों ने ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नागरिकों का आरोप है कि ट्रंप ने अमेरिका को मध्य पूर्व के एक अंतहीन और विनाशकारी युद्ध में धकेल दिया है। तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी सैनिकों के संभावित नुकसान से जनता में भारी गुस्सा है। हालांकि, ट्रंप के कट्टर समर्थक अभी भी इस सैन्य कार्रवाई को ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत सही ठहरा रहे हैं, जिससे अमेरिका में आंतरिक ध्रुवीकरण बढ़ गया है।

