तेल अवीव | ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण युद्ध के 21वें दिन एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिला है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष आग्रह पर इजराइल अब ईरान के ‘साउथ पारस’ जैसे महत्वपूर्ण ऑफशोर गैस फील्ड्स को निशाना नहीं बनाएगा। यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल और ईंधन की आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है। नेतन्याहू ने एक टेलीविजन संबोधन में दावा किया कि हालांकि इजराइल ने ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को काफी हद तक पंगु बना दिया है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित में वे ऊर्जा ठिकानों पर संयम बरतेंगे।
इजराइल के इस नरम रुख के बावजूद, संघर्ष की तीव्रता कम होती नहीं दिख रही है। ईरान ने फारसी नए साल ‘नौरोज’ के अवसर पर हुए इजराइली हवाई हमलों का बदला लेने के लिए शुक्रवार को इजराइल के उत्तरी हिस्सों, विशेषकर हाइफा और गैलिली में दर्जनों मिसाइलें दागीं। इस जवाबी कार्रवाई से लाखों नागरिक शेल्टरों में शरण लेने को मजबूर हो गए। युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $119$ डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो युद्ध शुरू होने के बाद से $60\%$ की भारी वृद्धि है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के कारण दुनिया की $20\%$ तेल आपूर्ति पहले से ही खतरे में है, जिससे यूरोपीय देशों में नेचुरल गैस के दाम पिछले एक महीने में दोगुने हो गए हैं।
युद्ध की आग अब खाड़ी के अन्य देशों तक भी फैल चुकी है। कतर की रास लफ्फान गैस सुविधा को हुए भारी नुकसान से उसका निर्यात $17\%$ कम हो गया है, जिसकी भरपाई में पांच साल लग सकते हैं। वहीं सऊदी अरब की यानबू रिफाइनरी पर भी हमले की खबरें हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठक में बहरीन और अन्य अरब देशों ने ईरान से इन हमलों को रोकने की पुरजोर अपील की है। फिलहाल, ईरान की कमान सर्वोच्च नेता के बेटे के हाथों में बताई जा रही है, जो पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो मध्य पूर्व का यह संकट एक पूर्ण वैश्विक आर्थिक मंदी का रूप ले सकता है।

