जबलपुर: 18 मार्च 1923 को जबलपुर के टाउन हॉल गांधी भवन में शुरू किए गए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के झंडा सत्याग्रह आंदोलन को शहर कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ जन बुधवार को भूलते नजर आए। हुआ यूं कि टाउन हॉल गांधी भवन में बुधवार को न तो शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा नजर आए और न ही वरिष्ठ कांग्रेसी। जिसका नतीजा था कि इस बार झंडा नहीं फहराया गया।
उधर कुछ निष्ठावान दो तीन कांग्रेसियों ने बस टाउन हॉल में दस्तक दी और वहां मौजूद लोगों को झंडा सत्साग्रह का इतिहास बताया और साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जबलपुर के गौरवशाली योगदान को भी साझा किया। इस संबंध में कांग्रेस नेता विष्णु विनोदिया ने कहा कि उन्होंने बच्चों को झंडा सत्याग्राह के बारे में जागरूक किया।
जबलपुर से हुई थी शुरूआत
विदित हो कि झंडा सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत संस्कारधानी जबलपुर से हुई थी। 1923 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक घटनाक्रम है, जिसका सूत्रपात 18 मार्च 1923 को जबलपुर के टाउन हॉल गांधी भवन में हुआ था। सुंदरलाल तपस्वी, सुभद्रा कुमारी चौहान और माखनलाल चतुवेर्दी जैसे नेताओं के नेतृत्व में उस्ताद प्रेमचंद जैन और उनके साथियों ने ब्रिटिश यूनियन जैक को हटाकर पहली बार सरकारी इमारत पर तिरंगा फहराया था जिससे पूरे देश में स्वतंत्रता की अलख जगी थी। इसके बाद हर साल झंडा सत्याग्रह के मौके पर टाउन हॉल में झंडा फहराया जाता रहा।
लेकिन इस वर्ष कांग्रेसी कार्यकर्ता इस दिन को भूल गए।असहयोग आंदोलन की सफलता और प्रतिवेदन के लिए कांग्रेस ने एक जांच समिति बनाई थी और वह जबलपुर पहुंची तब समिति के सदस्यों को विक्टोरिया टाऊन हाल में अभिनंदन पत्र भेंट किया गया और तिरंगा झंडा भी फहराया। तब से लेकर अब तक इस दिन को कांग्रेसी कार्यकर्ता याद करते हुए हर साल 18 मार्च को झंडा सत्याग्रह की याद में यहां झंडा फहराते रहे हैं।
