जबलपुर:कालिदास अकादमी, संस्कृति परिषद्, मध्यप्रदेश शासन, उज्जैन एवं प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल महाविद्यालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय राजशेखर समारोह 2026 का आयोजन शासकीय महाकोशल महाविद्यालय के प्रेक्षागृह में किया गया। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती पूजन के साथ हुई। मंच पर हल्की रोशनी और लाल-सुनहरे रंगों की सजावट ने गरिमामयी वातावरण तैयार किया। सभी उपस्थित लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ इस पावन अवसर को देख रहे थे। समारोह में केंट विधायक अशोक रोहाणी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, प्रो. शिवशंकर मिश्र, कुलगुरु, पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन ने सारस्वत अतिथि के रूप में मंच की शोभा बढ़ाई। प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने अध्यक्षीय भूमिका निभाई और पूरे हॉल में उत्साह की लहर दौड़ा दी।
कथक नृत्य और नाटिका ने किया मंत्रमुग्ध
कथक नृत्यांगना शालिनी खरे और उनके समूह ने कविराज राजशेखर के साहित्य पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति में भाव और तकनीक का अद्भुत संयोजन था, जिसने दर्शकों को पूरी तरह अपनी ओर आकर्षित कर लिया। हॉल में हर जगह तालियों की गड़गड़ाहट और मंत्रमुग्ध दर्शक नजर आए।
तकनीकी सत्रों में देशभर के विद्वानों ने किया गहन विमर्श
तीन तकनीकी सत्रों में देशभर के विद्वान और शोधार्थी राजशेखर की साहित्यिक दृष्टि, उनके युगीन संदर्भ और काव्यशास्त्र पर अपने शोध प्रस्तुत कर रहे थे। प्रमुख वक्ताओं में डॉ. त्रिभुवन पाठक (दिल्ली) और डॉ. रघुवीर प्रसाद गोस्वामी ने विचार रखे। डॉ. ममता गुप्ता ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
संस्कृत विभाग को मिला नया नाम
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अलकेश चतुर्वेदी ने महाविद्यालय के संस्कृत विभाग का नाम अब “कविराज राजशेखर संस्कृत विभाग” रखने की घोषणा की। यह घोषणा सुनते ही हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। भविष्य में राजशेखर की स्मृति में नियमित संगोष्ठियाँ, व्याख्यानमालाएँ और शोधपरक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम के अंत में समन्वयक प्रो. अरुण शुक्ल ने सभी अतिथियों, विद्वानों और सहभागियों को धन्यवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ममता गुप्ता द्वारा किया गया। आयोजन की सफलता में संगोष्ठी संयोजक डॉ. रामेश्वर झारिया, सह-संयोजक डॉ. शिवचंद वर्मा, सह-संयोजक डॉ. रविश तमन्ना तथा डॉ. जागेश्वर प्रजापति का विशेष योगदान रहा। इसके अतिरिक्त डॉ. इला घोष, डॉ. साधिका प्रसाद मिश्र, डॉ. माला प्यासी, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष आशीष राव, डॉ. सुगंधिता श्रीवास्तव एवं डॉ. सरिता यादव आदि उपस्थित रहे।
