
सतना। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी में प्रदर्शित विशिष्ट चित्रों ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती डॉ सुषमा चौबे की उपस्थिति में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार सुश्री गीता दास और बीनू गुप्ता दिल्ली ने अपने अपने चित्र की थीम एवं भावार्थ को विस्तार से प्रस्तुत किया।
सुश्री गीता दास ने बताया कि यह चित्र भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों और आधुनिक तकनीकी युग के मध्य सेतु का कार्य करता है। चित्र में आध्यात्मिक चेतना, गुरु-शिष्य परंपरा, देवी-देवताओं की उपस्थिति के साथ-साथ वर्तमान समय के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास को एक ही फ्रेम में संयोजित किया गया है।
उन्होंने कहा कि चित्र का मूल भाव यह है कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा आज भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की दिशा निर्धारित करने में सक्षम है। ध्यान, साधना और शिक्षा के पारंपरिक स्वरूप के साथ रोबोटिक्स, डिजिटल शिक्षा और शहरी विकास को दर्शाकर यह संदेश दिया गया है कि वास्तविक प्रगति परंपरा और नवाचार के समन्वय से ही संभव है।
प्रसिद्ध कलाकार बीनू गुप्ता ने अपने चित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि उनकी कृति के बाईं ओर प्राचीन भारत की उन्नत वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया गया है, जिसमें उड़ने वाली प्राचीन मशीनों की कल्पनाएं, हॉट एयर बैलून, भारतीय वाद्य यंत्र, प्रारंभिक विज्ञान एवं तकनीक, खगोल विज्ञान, चिकित्सा और कला के विविध आयाम तथा जंतर मंतर जैसे समय दर्शाने वाले प्रतीकों को शामिल किया गया है। चित्र के दाईं ओर आधुनिक भारत की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है, जिसमें रॉकेट, उपग्रह, हवाई जहाज़, वंदे भारत ट्रेन, माइक्रोचिप, तथा इसरो के रॉकेट लॉन्च जैसी उपलब्धियाँ प्रमुख रूप से दर्शाई गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति उनके सृजन का सबसे प्रिय माध्यम है, क्योंकि प्रकृति ही मानव की वास्तविक आधार शिला है और अनेक रूपों में हमे जीवन प्रदान करती है।
कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने कलाकारो के इस सृजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे चित्र विद्यार्थियों और समाज को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता के साथ आधुनिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रो चौबे ने कहा भारतीय ज्ञान परंपरा में परोपकारी शिक्षा का समावेश था किन्तु आधुनिक काल में अपने अपने हितों को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कलाकारों की रचनात्मक प्रस्तुति से समाज को नवीन दिशा मिलेगी। प्रदर्शनी में उपस्थित विद्यार्थियों, कला प्रेमियों एवं प्राध्यापकों ने चित्र की विषयवस्तु और प्रस्तुति को अत्यंत प्रभावशाली एवं प्रेरणादायक बताया। कुलसचिव प्रो आञ्जनेय पांडेय ने चित्रों की भावाभिव्यक्ति को सराहा। वरिष्ठ अभियंता रमा कांत त्रिपाठी ने विद्यार्थियों के सृजन कौशल की प्रशंसा की। इस मौके पर डॉ अरुणा जबलपुर, प्रलय कुंडू दिल्ली, सुरेश कुमार दिल्ली, दामिनी शर्मा दिल्ली, किशन सोनी, डॉ अजय गुप्ता झांसी, डॉ संध्या मिश्रा आदि प्रख्यात चित्रकार और कलाकारों ने अपनी कृतियों को प्रदर्शित किया। इस प्रदर्शनी के संयोजक डॉ अभय कुमार वर्मा ने बताया कि यह प्रदर्शनी विश्वविद्यालय की कला वीथिका में 18 मार्च तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। ललित कला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ प्रसन्न पाटकर एवं डॉ राकेश कुमार ने आयोजन के उद्देश्य को बताया।
