पश्चिम एशिया संकट से दुनिया भर में भुखमरी का खतरा; 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग हो सकते हैं प्रभावित

रोम ,17 मार्च (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र के संगठन विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्लूयईपी) ने मंगलवार को एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अधिक बढ़ता है, तो साल 2026 में वैश्विक खाद्य असुरक्षा अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती है। डब्ल्यूएफपी की यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी है। संगठन के नए विश्लेषण के अनुसार, युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आने से करोड़ों लोग ‘गंभीर भुखमरी’ की चपेट में आ सकते हैं। इसमें कहा गया है कि अगर यह संघर्ष साल के मध्य तक समाप्त नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो लगभग 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग खाद्य असुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे। वर्तमान में दुनिया भर में 31.8 करोड़ लोग पहले से ही खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। नया संकट इस संख्या को यूक्रेन युद्ध के समय देखे गए 34.9 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर के करीब ले जा सकता है।

इसमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया हालांकि मध्य पूर्व मुख्य रूप से ‘एनर्जी हब’ है न कि अनाज भंडार, लेकिन ऊर्जा की कीमतों में उछाल का सीधा असर परिवहन, खाद और खेती की लागत पर पड़ता है, जिससे खाद्य सामग्री महंगी हो जाती है। डब्ल्यूएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, आयात पर निर्भर रहने वाले अफ्रीका और एशिया के देशों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ेगा। अकेले एशिया में खाद्य असुरक्षित लोगों की संख्या में 24 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। जबकि पश्चिम और मध्य अफ्रीका में 21 प्रतिशत और पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में 17 फीसदी की वृद्धि का पूर्वानुमान है। डब्ल्यूएफपी के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा, “यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रभावित करेगा और उन परिवारों को सबसे ज्यादा चोट पहुँचाएगा जो पहले से ही अपने अगले भोजन का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मानवीय सहायता के लिए पर्याप्त फंडिंग नहीं मिली, तो यह करोड़ों लोगों के लिए तबाही का कारण बन सकता है।
उल्लेखनीय है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में जहाजों की आवाजाही के लगभग रुक जाने और लाल सागर में बढ़ते जोखिमों ने पहले ही ईंधन और उर्वरक की कीमतों को बढ़ा दिया है। सूडान जैसे देश, जो अपनी जरूरत का 80 फीसदी गेहूं आयात करते हैं, और सूखे से जूझ रहे सोमालिया जैसे देशों में बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

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