ईरान के हथियारों के ठिकानों को नष्ट नहीं कर सकता अमेरिका : क़ालिबाफ़

तेहरान, 17 मार्च (वार्ता) ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने चेतावनी दी है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान के हथियार ठिकानों को नष्ट नहीं कर सकता और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नया समीकरण उभर सकता है। श्री क़ालिबाफ़ ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि विश्व के बड़े हिस्से के तेल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य अब पहले जैसा नहीं रहेगा और इसकी सुरक्षा स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने इसके लिए क्षेत्र में अमेरिका और इजराइल की मौजूदगी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले संघर्षों से सबक लेते हुए अपनी सैन्य प्रणालियों में बदलाव किया है और अब पारंपरिक हवाई हमलों से उसके ठिकानों को नुकसान पहुंचाना आसान नहीं है।

श्री क़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे न तो झुकेगा और न ही आत्मसमर्पण करेगा। उन्होंने दावा किया कि जब यह संघर्ष समाप्त होगा तो मध्य पूर्व की व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा, जो अमेरिकी हितों के अनुकूल नहीं होगा, बल्कि क्षेत्र के इस्लामी देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था स्वयं स्थापित करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इजरायल अपने अभियान में केवल ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या तक ही सीमित रहे, लेकिन इससे देश की व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ा। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ‘मोज़ेक रक्षा’ रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रणाली देश को इस स्थिति में सक्षम बनाती है कि वह तय कर सके कि युद्ध कब और कैसे समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस विकेंद्रीकृत रक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी संभावित हमले के बावजूद सैन्य और नेतृत्व संरचना की निरंतरता बनाए रखना है।

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