खोड़ाना तालाब डूब में गई भूमि के मुआवजे की प्रतीक्षा में पथरा गई किसानों की आँखें

जावरा। मंदसौर और रतलाम जिले की सीमा पर बनें खोडाना तालाब के डूब में गई जमीन के मुआवजे का क्षेत्र के किसानों को वर्षों से इंतजार है। इतनी लंबी प्रतीक्षा करते-करते अब तो प्रभावित कृषकों की आंखें पथरा गई है। लेकिन शासन स्तर पर उनकी भूमि के मुआवजे को लेकर ठोस नीति नहीं बन पाई। इस मामले में सरकारी स्तर पर अब तक जो भी प्रयास हुए वह नाकाफी ही रहे।

तालाब में जिन किसानों की जमीन गई उनको इस बात का बेहद मलाल है कि खोडाना तालाब उनकी खेती योग्य उपजाऊ भूमि खा गया, बावजूद इसके उनको आज तक जमीन का मुआवजा नहीं मिल पाया। तालाब डूब से प्रभावित किसान सालों से मुआवजा राशि की आस लगाए बैठे हैं। परंतु हर बार राजनीतिक उलटफेर होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता गया। यह भी सोलह आने सच है कि प्रदेश में सरकारें बदलती रही, क्षेत्र में जनप्रतिनिधि बदलते रहे, मगर प्रभावित किसानों की किस्मत नहीं बदल पाई। ऐसी स्थिति में मजबूर होकर हर साल अक्टूबर-नवंबर माह में उक्त लबालब भरे जलाशय का पानी आसपास के किसान बहा देते हैं। ताकि वे एक फसल बो सके। बता दें कि अगर प्रभावित कृषक वर्षाकाल में एकत्रित इसका पानी बहाकर इसे खाली नहीं करें तो आसपास के बीस से ज्यादा ग्रामों के कुओं व नलकूपों का जलस्तर बना रह सकता है। जानकारी के अनुसार लगभग 110 साल पहले बनाए गए इस तालाब में डेढ सौ से अधिक यहां के कृषकों की जमीन उपयोग में ली गई। बताते हैं कि उक्त डेम करीबन 1200 बीघा जमीन पर फैला हुआ है।

विधानसभा में उठाऊंगा मामला: विधानसभा क्षेत्र मंदसौर विधायक विपिन जैन ने बताया कि खोडाना तालाब का हिस्सा मंदसौर विधानसभा क्षेत्र में भी आता है। किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। इस सम्बंध में विधानसभा में भी प्रश्न लगाने का मन बना रखा है। मुआवजा देना प्रदेश सरकार पर निर्भर है। किसानों को मुआवजा कब तक मिलेगा, यह ग्यारंटी के साथ नहीं कह सकते। लेकिन इस मामले में हमारे प्रयास जारी है।

प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति दिलवाई: विधानसभा क्षेत्र जावरा के विधायक डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि तात्कालिक समय में मेरे द्वारा इसे विभागीय तौर पर प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति दिलवाई गई थी। लेकिन अगला विधानसभा चुनाव हार जाने के कारण अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा उक्त स्वीकृति को पूरी तरह निरस्त करवा दिया गया। अब सम्बंधित विभाग इसके लिए तैयार नहीं है। फिर भी कोशिश रहेगी कि पीडित लोगों को मुआवजा राशि प्राप्त हो।

क्षेत्र डार्क झोन घोषित

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पिपलौदा क्षेत्र जल अभावग्रस्त घोषित हो चुका है। वहीं खोडाना तालाब पिपलौदा विकासखंड के रणायरा, रिछा देवडा गांवों की सीमा में स्थित है। जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच इस डेम का पानी व्यर्थ बहा दिया जाना चिंता का विषय है। दो जिले की सीमाओं के बीच स्थित खोडाना तालाब ने मुआवजे को लेकर प्रभावित किसानों

को मझधार में छोड दिया है। पीडित अन्नदाताओं की सुनवाई ना तो रतलाम प्रशासन द्वारा की जाती है और ना ही मन्दसौर प्रशासन उनकी समस्या को समझने को तत्पर नजर आता है। ऐसी दशा में किसान लोग जाए तो जाए कहां।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पिपलौदा क्षेत्र जल अभावग्रस्त घोषित हो चुका है। वहीं खोडाना तालाब पिपलौदा विकासखंड के रणायरा, रिछा देवडा गांवों की सीमा में स्थित है। जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच इस डेम का पानी व्यर्थ बहा दिया जाना चिंता का विषय है। दो जिले की सीमाओं के बीच स्थित खोडाना तालाब ने मुआवजे को लेकर प्रभावित किसानों को मझधार में छोड दिया है। पीडित अन्नदाताओं की सुनवाई ना तो रतलाम प्रशासन द्वारा की जाती है और ना ही मन्दसौर प्रशासन उनकी समस्या को समझने को तत्पर नजर आता है। ऐसी दशा में किसान लोग जाए तो जाए कहां।

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