रायपुर, 16 मार्च (वार्ता) ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने तीन दिवसीय प्रवास पर रविवार रात छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे। अपने दौरे में वह विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे। रायपुर पहुंचने के बाद उन्होंने देश के पांच राज्यों में घोषित विधानसभा चुनावों और गौ-संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
शंकराचार्य ने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और समय-समय पर होते रहते हैं लेकिन सबसे अहम बात यह है कि देश में ऐसी सरकारें न बनें जो गौ-विरोधी नीतियां अपनाती हों। उन्होंने कहा कि समाज को इस विषय पर सजग रहना होगा और आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में गौ-समर्थक राजनीतिक दल सक्रिय हैं, वहीं कुछ जगहों पर गौ-रक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट स्थिति दिखाई नहीं देती, इसलिए वे किसी एक दल का समर्थन करने की स्थिति में नहीं हैं।
गौ-संरक्षण से जुड़ी योजनाओं पर बात करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि केवल योजनाएं शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सबसे पहले गाय को “मां” के रूप में सम्मान देने की भावना विकसित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई जगहों पर गौ-पालन को केवल पशुपालन की तरह देखा जा रहा है। उनके अनुसार पूर्व सरकार के समय बनाए गए गौ-आधारित ढांचे का उचित उपयोग नहीं हो पा रहा है और नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं।
छत्तीसगढ़ी में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि जो सरकार गाय को “गौ माई” कहकर सम्मान नहीं दे सकती, उसे हिंदू सरकार कहना कठिन है।
धर्मांतरण से जुड़े प्रस्तावित कानून पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। शंकराचार्य ने कहा कि अगर सरकार इस संबंध में सख्त कानून लाती है तो वे उसका खुले दिल से स्वागत करेंगे, लेकिन पहले सरकार को इसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
