
नीमच। शहर से करीब मत्र 3 किमी दूर स्थित गांव बरुखेड़ा मंदिर 11वीं-12वां सदी के हैं । ये मंदिर कुछ साल पहले तक जर्जर और खस्ताहाल स्थिति में थे । इनकी दशा देखकर पुरात्त्व विभाग ने इनकी सुध ली । विभाग ने इन मंदिरों का कायाकल्प कराया। बरुखेड़ा के तीन मंदिरों में पहले और दूसरे मंदिर को विकासित करने के साथ यहां सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्रीवाल के साथ जीर्ण शीर्ण हो चुके मंदिर की मरम्मत के साथ दोनों मंदिरों को आकर्षक और सौंदर्यीकरण के लिए मंदिर परिसर को सुंदर बगीचे के रुप में विकसित किया था लेकिन जैसे-जैसे समय बितता गया मंदिर क्रमांक 1 और मंदिर क्रमांक 2 के परिसर में विकसित किए बगीचे देखरेख के अभाव में उजडने लगे । मंदिर क्रमांक 1 परिसर का सीमेंट भी जगह-जगह से उखडऩे लगा है। यहां सुरक्षा के लिए 24 घंटे चौकीदार की तेनाती आवश्यक है लेकिन यह व्यवस्था अब तक मौजूद नहीं है। जागरुक लोगों का कहना है पुरात्त्व महत्व की धरोहरों को सुरक्षित करने के लिए यहां सीसीटीवी कैमरे भी आवश्यक है लेकिन प्रशासन ने इस तरह की कोई सुविधा उपब्ध नहीं कराई है। इसी तरह बरुखेड़ा गांव के तालाब के समीप तीसरे शिव मंदिर की सुरक्षा के लिए यहां बाउंड्रीवाल वाल तो बना दी लेकिन मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए बगीचा विकसित नहीं किया है।फर्शीकरण के साथ ही इसकी मरम्म्त कार्य भी जवाब देने लगा है। हालांकि मंदिर क्रमांक 1 व 2 में दर्शन व पूजन के लिए ें लोगों की आवाजाही शुरू हो गई। विशेष कर श्रावण मास में इन दोनों मंदिरों में श्रद्धालु काफी संख्या में दर्शन के लिए आते है। ग्रामवासियों की इन मंदिरों के प्रति अगाध आस्था है।
मंदिरों की शिल्पकारी देखते ही बनती है-
नीमच जिला मुख्यालय से बमुश्किल 3 किमी की दूरी पर ग्राम पंचायत बरूखेड़ा है। गांव में 12-13वीं सदी के तीन प्राचीन मंदिर हैं। इनमें शिवलिंग विराजित हैं। इसके अलावा मंदिर प्राचीन कलाकृति के अनुपम उदाहरण हैं। पुरातत्व विभाग ने देखरेख का दायित्व अपने हाथों में ले रखा है, फिर भी मंदिर उपेक्षा के शिकार हैं।
जिला मुख्यालय से बमुश्किल 3 किमी की दूरी पर ग्राम पंचायत बरूखेड़ा है। गांव में 12-13वीं सदी के तीन प्राचीन मंदिर हैं। इनमें शिवलिंग विराजित हैं। इसके अलावा मंदिर प्राचीन कलाकृति के अनुपम उदाहरण हैं। पुरातत्व विभाग ने देखरेख का दायित्व अपने हाथों में ले रखा है।बरूखेड़ा में प्रवेश करते ही 12-13वीं सदी के प्राचीन मंदिर गांव व नीमच क्षेत्र की प्राचीनता व वैभव को बयां करते हैं। 12-13वीं सदी में यह क्षेत्र काफी अहम माना जाता था।
