अडानी समूह 2027 तक अपनी एयरपोर्ट इकाई को सूचीबद्ध करने की योजना पर काम कर रहा है; $100 बिलियन के बड़े निवेश लक्ष्य के बीच यह कदम निवेशकों के लिए लाएगा नए अवसर, डीमर्जर की भी संभावना।
मुंबई, 17 जून (वार्ता): भारतीय उद्योग जगत में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाला अडानी समूह अब अपनी एयरपोर्ट इकाई, अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL), को सार्वजनिक करने की बड़ी तैयारी में है। खबरों के अनुसार, समूह 2027 तक इस इकाई का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की योजना बना रहा है, जो इसकी महत्वाकांक्षी $100 बिलियन की विस्तार योजना का एक अहम हिस्सा है। इस खबर से निवेशकों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है, जो भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में सीधे निवेश का मौका तलाश रहे हैं।
अडानी एयरपोर्ट्स लिमिटेड, जो वर्तमान में भारत में आठ हवाई अड्डों का संचालन करती है और देश के यात्री यातायात का लगभग 23% और हवाई कार्गो यातायात का 29% संभालती है, को अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड से अलग कर एक स्वतंत्र सूचीबद्ध इकाई के रूप में लाने की संभावना है। समूह के अधिकारियों के अनुसार, यह डिमर्जर (Demerger) 2027-28 के वित्तीय वर्ष तक पूरा होने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य हवाई अड्डे के व्यवसाय को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना, स्वतंत्र परिचालन क्षमता विकसित करना और भविष्य में तीव्र विकास के लिए आवश्यक निवेश आकर्षित करना है। हाल ही में, अडानी एयरपोर्ट्स ने अंतरराष्ट्रीय बैंकों के एक संघ से $750 मिलियन का धन भी जुटाया है, जिसका उपयोग मौजूदा ऋणों के पुनर्वित्त और हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे के उन्नयन में किया जाएगा, जिसमें लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी हवाई अड्डे शामिल हैं। इसके साथ ही, समूह अपनी गैर-एयरोनॉटिकल राजस्व धाराओं, जैसे खुदरा, ड्यूटी-फ्री, खाद्य और पेय पदार्थ, और यात्री सेवाओं का भी विस्तार कर रहा है।
यह IPO अडानी समूह के कुल $100 बिलियन के निवेश लक्ष्य का हिस्सा है, जिसे समूह अगले पांच से छह वर्षों में ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न व्यवसायों में लगाएगा। अडानी समूह का मानना है कि हवाई अड्डों जैसे नए परिसंपत्ति वर्ग 2030 तक $20 बिलियन का अतिरिक्त राजस्व ला सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लिस्टिंग न केवल अडानी समूह को अपने विशाल निवेश योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने में मदद करेगी, बल्कि निवेशकों को भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में प्रत्यक्ष जोखिम भी प्रदान करेगी। यह कदम अडानी समूह की रणनीति का हिस्सा है, जहां वे अपने मुख्य बुनियादी ढांचा व्यवसायों से मूल्य अनलॉक करना चाहते हैं और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करते हुए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करना चाहते हैं।

