इंदौर को मिलेगी ‘ग्रीन ढाल’ : देवगुराड़िया में बनेगा नगर वन पार्ट-2

इंदौर: तेजी से कांक्रीट के जंगल में बदल रहे इंदौर शहर में हरियाली बढ़ाने की बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है. देवगुराड़िया क्षेत्र में पहले से विकसित हो रहे नगर वन के साथ अब उसका पार्ट-2 भी बनाया जाएगा. करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से 50 हेक्टेयर जमीन पर नया अर्बन फॉरेस्ट तैयार होगा. इसके साथ ही अगले दो साल में शहर और आसपास चार नए नगर वन विकसित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे इंदौर को ‘ग्रीन कवर’ बढ़ाने में मदद मिलेगी.

एसडीओ अमित सोलंकी ने बताया कि शहर की बिगड़ती आबोहवा और तेजी से घटती हरियाली के बीच वन विभाग ने इंदौर को और हराभरा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत देवगुराड़िया क्षेत्र में पहले से विकसित हो रहे नगर वन के साथ अब अतिरिक्त 50 हेक्टेयर जमीन पर एक और नगर वन तैयार करने की योजना बनाई है. इस प्रोजेक्ट पर करीब दो करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. इंदौर वन मंडल की रेंजर संगीता ठाकुर ने बताया कि सांसद शंकर लालवानी के सहयोग से नगर वनों के प्रस्ताव तैयार कर केंद्र को भेजे जा चुके हैं. यदि मंजूरी मिलती है तो करीब आठ करोड़ रुपए की लागत से अगले दो वर्षों में चार नए नगर वन विकसित किए जाएंगे.

उन्होंने बताया कि देवगुराड़िया में पहले चरण में नगर वन विकसित किया जा रहा है, जिसका काम अंतिम चरण में है. इसी क्षेत्र में अब उसका दूसरा चरण यानी नगर वन पार्ट-2 विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इसका उद्देश्य शहर के पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना और नागरिकों को प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना है. पिछले कुछ वर्षों में शहर में तेजी से पेड़ों की कटाई और शहरी विस्तार के कारण हरियाली कम होती जा रही है. ऐसे में केंद्र सरकार की योजना के तहत नगर वन विकसित कर शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इसी योजना के तहत इंदौर को भी पिछले वर्षों में आईआईटी सिमरोल और देवगुराडç¸या में करीब 50-50 हेक्टेयर क्षेत्र में दो नगर वन की सौगात मिली है, जिनका निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में है.

वर्ष 2028 तक विकसित होंगे नए नगर वन
अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2026 से 2028 के बीच शहर और आसपास चार और नए नगर वन विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की निधि से पूरा किया जाएगा. प्रस्तावित स्थानों में देवगुराडç¸या के अलावा पुलिस फायरिंग रेंज दतौनी, मोरोद सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं. इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर के आसपास हरित क्षेत्र बढ़ेगा, जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा और नागरिकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच समय बिताने के लिए नए स्थल भी उपलब्ध होंगे.

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