नयी दिल्ली 14 मार्च (वार्ता) पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत में फंसे कई ईरानी नागरिक ईरान की एक चार्टर्ड उड़ान में शुक्रवार रात को कोच्चि हवाई अड्डे से रवाना हुए जिनमें ईरानी दूतावास के कर्मचारी, पर्यटक और कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने वाले ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस लावन के कुछ नौसैनिक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को पश्चिम एशिया की स्थिति के बारे में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की नियमित ब्रीफिंग में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ईरान ने पश्चिम एशिया संकट के कारण यहां फंसे अपने नागरिकों के लिए एक चार्टर्ड उडान की व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि इसमें कोच्चि में लंगर डालने वाले ईरान के युद्धपोत लावन के चालक दल के गैर जरूरी सदस्य भी गये हैं।
प्रवक्ता ने कहा ,” एक और घटनाक्रम कल रात सामने आया। संघर्ष के कारण व्यापक स्तर पर उड़ानों में व्यवधान पैदा हो गया, जिसके चलते कई ईरानी नागरिक भारत में फंस गए थे। ईरानी अधिकारियों ने इन फंसे हुए नागरिकों को वापस ले जाने के लिए एक चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की। इन यात्रियों में वे ईरानी भी शामिल थे जो भारत में पर्यटक के रूप में आए हुए थे, साथ ही वे लोग भी जो यहां राजनयिक के रूप में तैनात थे। यह उड़ान कल रात कोच्चि से रवाना हुई। इसके यात्रियों में आईआरआईएस लावन के उस जहाज के गैर-आवश्यक क्रू सदस्य भी शामिल थे। यह युद्धपोत अभी कोच्चि में ही है।
उल्लेखनीय है कि ईरान का युद्धपोत लावन दो और ईरानी युद्धपोतों के साथ फरवरी में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा निरीक्षण और मिलन अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए विशाखापत्तनम आया था। जब ये युद्धपोत वापस लौट रहे थे तो अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अमेरिका ने ईरान के एक युद्धपोत को श्रीलंका के निकट हिन्द महासागर में डुबो दिया था। इस बीच ईरान ने लावन में खराबी का हवाला देते हुए इसे कोच्चि बंदरगाह में रोकने की भारत से अनुमति मांगी थी। भारत ने एक मार्च को यह अनुमति दी थी और यह युद्धपोत चार मार्च से कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डाले हुए है। इसमें कुल 180 नौसैनिक सवार थे। ईरान नौसेना का तीसरा युद्धपोत श्रीलंका में लंगर डाले हुए है।
