दुबई/वॉशिंगटन | ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में 2,500 अतिरिक्त मरीन कमांडोज और एक अत्याधुनिक बख्तरबंद युद्धपोत ‘USS त्रिपोली’ को तैनात करने का आदेश दिया है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को जापान से रवाना कर दिया गया है, जो अगले एक हफ्ते के भीतर अरब सागर में पहुंच जाएगी। इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर जल-थलीय (Amphibious) सैन्य कार्रवाई को अंजाम देना है। वर्तमान में अमेरिकी नौसेना के 12 बड़े जहाज और एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ पहले से ही क्षेत्र में मुस्तैद हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘खार्ग द्वीप’ के सैन्य ढांचे को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है। फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अपनी आक्रामक गतिविधियां बंद नहीं कीं, तो अगला निशाना इस द्वीप का ‘तेल इंफ्रास्ट्रक्चर’ होगा। बता दें कि खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध की समाप्ति तभी होगी जब वे इसे “अपनी हड्डियों में महसूस करेंगे”। उन्होंने ईरानी अर्धसैनिक बल ‘बसीज’ को भी चेतावनी दी कि अब उनके दमनकारी रवैये का अंत करीब है।
अमेरिकी सैन्य हलचल पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर ने इसे खुली उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि खार्ग द्वीप के तेल ठिकानों पर हमला हुआ, तो ईरान बदले की कार्रवाई का ऐसा स्तर शुरू करेगा जिससे पूरी दुनिया हिल जाएगी। वर्तमान में कतर स्थित अल-उदीद एयर बेस पर करीब 8,000 अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ‘USS त्रिपोली’ की एंट्री से अरब सागर में शक्ति संतुलन बदल सकता है, लेकिन इससे तेल की वैश्विक आपूर्ति ठप होने और विश्व स्तर पर आर्थिक मंदी आने का खतरा भी बढ़ गया है।

