हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से $150 तक पहुँच सकता है कच्चा तेल, दुनिया पर मंडराया भीषण ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में मचेगी भारी तबाही

नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म ‘नुवामा’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ का मार्ग 4 से 8 हफ्तों के लिए बाधित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के ऐतिहासिक स्तर को छू सकती हैं। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 25% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने का सीधा अर्थ है वैश्विक सप्लाई चेन का पूरी तरह ध्वस्त हो जाना, जिससे बिजली उत्पादन से लेकर परिवहन तक सब कुछ महंगा हो जाएगा।

भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि कच्चा तेल $150 के पार जाता है, तो भारत के चालू खाता घाटे (CAD) में भारी बढ़ोतरी होगी और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ेगा। इससे भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले अपने निचले स्तर पर पहुँच सकता है।

संकट के समाधान के रूप में दुनिया भर के देश अपने ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) से तेल निकालने पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में 30 से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने से कीमतों में तात्कालिक राहत तो मिल सकती है, लेकिन यह केवल एक अस्थायी उपाय है। भंडार खाली होने के बाद उन्हें फिर से भरना अनिवार्य होगा, जिससे तेल की मांग में अचानक उछाल आएगा और कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर हैं, जहाँ बढ़ता तनाव वैश्विक आर्थिक मंदी का संकेत दे रहा है।

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