तेहरान, 13 मार्च (वार्ता) अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में शुक्रवार को क़ुद्स डे के मौके पर हजारों लोग सड़कों पर उतरे।
रैली में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी भी जनता के साथ शामिल हुए, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि देश का नेतृत्व अभी भी स्थिति पर नियंत्रण में है।
रैली में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी मौजूद थे। दोनों नेताओं को ईरान और फिलिस्तीन के झंडे लहराते लोगों के बीच मार्च करते देखा गया।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में रैली स्थल से कुछ दूरी पर धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए, जहां हमले होने की खबर थी। इसके बावजूद लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी पर इसका असर नहीं पड़ा।
क़ुद्स डे, जो रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है, आमतौर पर ईरान में फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन के रूप में आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच युद्ध दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और हमलों में देश के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं।
रैली में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि लगातार बमबारी के बावजूद ईरान का सत्ता ढांचा सक्रिय है और नेतृत्व की कमी से उत्पन्न शून्य को भरने की कोशिश की जा रही है।
रैली के दौरान रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि तेहरान ही नहीं बल्कि देश के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने कहा, “आज ज़ायोनी शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका के हमलों के बावजूद हम भारी जनसमर्थन देख रहे हैं। केवल तेहरान ही नहीं बल्कि पूरे देश में लाखों लोग इस रैली में शामिल हुए हैं।”
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस रैली में नजर नहीं आए। उनके न आने को लेकर यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में हुए हमलों में उन्हें हल्की चोट लगी थी, जिसमें उनके पिता और लंबे समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अली खामेनेई की मौत हो गई थी।
रैली में न्यायपालिका प्रमुख गोलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई भी मौजूद थे, जिन्होंने सभा के दौरान प्रार्थना का नेतृत्व किया।
मार्च के दौरान पत्रकारों से बात करते समय एक विस्फोट की आवाज सुनाई दी, जिसे पास में हुए हमले से जोड़ा गया। इसके बाद श्री मोहसेनी-एजेई ने कहा, “दुश्मन के इन हमलों से जनता डरी नहीं है। लोग सावधानी जरूर बरतते हैं, लेकिन बारिश हो या मिसाइल हमले, वे किसी भी हालत में प्रतिरोध से पीछे नहीं हटेंगे।”
