
जबलपुर। सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में जानकारी पेश की गयी कि यूनियन कार्बाइड परिसर में भोपाल गैस मेमोरियल बनाया जायेगा। इसके लिए अपर मुख्य सचिव भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजित की गयी थी। बैठक में सफाई, टॉक्सिक वेस्ट को हटाने एव आस-पास की खराब मिट्टी और ग्राउंड वाटर के सुधार, खराब प्लांट स्ट्रक्चर के डिटॉक्सिफिकेशन और डीकंटैमिनेशन पर चर्चा की गयी। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन रूल्स 2025 के तहत तैयार इस कार्य के लिए शॉर्ट-टेंडर जारी करने का निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह तथा जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने सरकार को कार्य योजना की रिपोर्ट प्रस्तुत करने निर्देश जारी करते हुए अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की है।
गौरतलब है कि साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रही है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से पेश रिपोर्ट में बताया गया था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है। जहरीले कचरे से लगभग 900 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है। इस दौरान हाईकोर्ट में दायर की गयी अन्य याचिका में कहा गया था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है। राख में मरकरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जापान व जर्मनी के पास है। हाईकोर्ट ने उक्त याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किये जाने के आदेश जारी किये गये थे।
याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में सरकार के द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया जाने पर रोक लगा दी थी। सरकार के आवेदन पर हाईकोर्ट ने उक्त आदेश वापस ले लिया था। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि जहरीले कचरे से निकाली राख की लैंड फिलिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश की गयी।
