
जबलपुर। माँ कर्मा केवल साहू समाज की ही नहीं बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए भक्ति, प्रेम और सेवा की प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि माँ कर्मा की खिचड़ी प्रसंग की कथा हमें सिखाती है कि भगवान सच्चे प्रेम और निस्वार्थ भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं। उक्त बातें लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने माँ कर्मा देवी की 1010वीं जयंती के अवसर पर निकली शोभायात्रा में पूजन- अर्चन कर रवाना करते हुए कही। भक्त शिरोमणि माँ कर्मा देवी की 1010वीं जयंती के अवसर पर भक्ति, आस्था और उत्साह से सराबोर नजर आया। साहू समाज जबलपुर के तत्वावधान में निकाली गई भव्य शोभायात्रा में हजारों की संख्या में मातृशक्ति, युवा और वरिष्ठजन शामिल हुए। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती इस शोभायात्रा में श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यात्रा में साहू समाज के सदस्य सिर पर साफा बांधकर बड़ी संख्या में शामिल हुए।
शोभायात्रा का शुभारंभ शहर के हृदय स्थल मालवीय चौक स्थित भव्य मंच से हुआ। यहां प्रदेश शासन के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, विधायक लखन घनघोरिया, भाजपा जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, पूर्व महापौर प्रभात साहू, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज, समरसता सेवा संगठन अध्यक्ष संदीप जैन, दिनेश यादव और कार्यक्रम संयोजक रविकिरण साहू की उपस्थिति में माँ कर्मा का पूजन एवं आरती कर यात्रा को रवाना किया गया।
विभिन्न सामाजिक संगठनों ने किया स्वागत
भव्य शोभायात्रा मालवीय चौक से प्रारंभ होकर सुपर मार्केट, लार्डगंज, बड़ा फुहारा, सराफा कोतवाली, मिलोनीगंज चौक और हनुमानताल से होते हुए बड़ी खेरमाई मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। यात्रा मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
माँ कर्मा भगवान कृष्ण (जगन्नाथ जी) की अनन्य भक्त
कार्यक्रम संयोजक रविकिरण साहू ने बताया कि माँ कर्मा भगवान कृष्ण (जगन्नाथ जी) की अनन्य भक्त थीं और अपने हाथों से खिचड़ी बनाकर उन्हें भोग लगाती थीं। उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि स्वयं भगवान जगन्नाथ उनके हाथों का भोजन ग्रहण करने आते थे। “माँ कर्मा का भात, जगत पसारे हाथ” कहावत उनकी महान भक्ति का प्रतीक है।
नागपुर से आए 65 युवक-युवतियों का ढोल-ताशा रहा आकर्षण
शोभायात्रा का आकर्षण महाराष्ट्र के नागपुर से आए 65 युवक-युवतियों का ढोल-ताशा दल रहा, जिसकी ताल पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। इसके साथ ही माँ कर्मा के जीवन प्रसंग, भगवान जगन्नाथ स्वामी, भगवान शंकर, शेर नृत्य, माशाने की होली और दुल-दुल घोड़ी की सजीव झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया।
