रिकॉर्ड में हेरफेर या अतिक्रमण? राजस्व टीम ने किया सीमांकन, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

बैतूल। मुलताई क्षेत्र में ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र की जमीन से जुड़ा अतिक्रमण का मामला सामने आया है। तहसील प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में लगभग 108 वर्ष पुराने राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव और जमीन के नामांतरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।

यह जांच ताप्ती विकास प्राधिकरण समिति मुलताई की शिकायत के बाद शुरू की गई थी। समिति ने आरोप लगाया था कि वर्ष 1917-18 के राजस्व रिकॉर्ड में ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र के रूप में दर्ज खसरा नंबर 242 की भूमि को बाद के वर्षों में अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया, जो नियमों के विरुद्ध है।

समिति के अनुसार वर्तमान में खसरा नंबर 560 में भूमि विकास के नाम पर छह बटांकन दर्ज किए गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह बंटवारा किस आधार पर किया गया और इसके लिए किन प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। समिति ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुलताई तहसीलदार ने फरवरी 2026 में एक जांच दल का गठन किया। इसके बाद तहसील कार्यालय द्वारा 10 मार्च को छह संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 12 मार्च को मौके पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित तिथि पर राजस्व विभाग की टीम ने संबंधित पक्षों की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की और पुराने दस्तावेजों के आधार पर स्थिति का निरीक्षण किया।

जांच के दौरान यह सामने आया कि वर्ष 1917-18 के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 242 की कुल 0.58 एकड़ भूमि ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र के रूप में दर्ज थी। यह जमीन नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जल निकासी से संबंधित क्षेत्र का हिस्सा मानी जाती थी।

बाद में वर्ष 1954-55 में इस भूमि को तीन हिस्सों में विभाजित किए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में मिला। इसके अनुसार खसरा नंबर 242/1 में 0.38 एकड़ भूमि नालाबंदी के नाम दर्ज की गई, जबकि खसरा नंबर 242/2 में 0.10 एकड़ भूमि सत्यनारायण मंदिर के नाम और खसरा नंबर 242/3 में 0.10 एकड़ भूमि नाले के नाम दर्ज की गई।

इसके बाद वर्ष 1972-73 में राजस्व रिकॉर्ड में एक और परिवर्तन दर्ज किया गया, जिसमें खसरा नंबर 242/1 का नया नंबर 563 कर दिया गया। वहीं अन्य अभिलेखों में खसरा नंबर 240 और 242/3 को मिलाकर नया खसरा नंबर 560 बनाया गया, जिसमें कुल 1.60 एकड़ भूमि दर्ज बताई गई है। इसी खसरा नंबर 560 में वर्तमान समय में छह बटांकन दर्ज होने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और भूमि के स्वामित्व तथा उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन कर वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया। निरीक्षण के बाद तैयार किए गए पंचनामा में राजस्व विभाग के अधिकारियों और उपस्थित लोगों के हस्ताक्षर दर्ज किए गए हैं। पंचनामा में घनश्याम सोनी, दिनेश कालभोर, रोहित करदाते और वीरेंद्र सहित अन्य लोगों के हस्ताक्षर शामिल बताए गए हैं।

तहसील प्रशासन का कहना है कि जांच दल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। पुराने राजस्व दस्तावेजों, सीमांकन की रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में राजस्व रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता, हेरफेर या नदी के प्रवाह क्षेत्र में अतिक्रमण पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Next Post

पारधी दंपति हत्याकांड: पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे सभी आरोपों से बरी

Fri Mar 13 , 2026
भोपाल। पूर्व मंत्री और पूर्व कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे को वर्ष 2007 के मुलताई पारधी दंपति हत्याकांड और उससे जुड़े हिंसा के मामले में अदालत से राहत मिली है। भोपाल की विशेष अदालत ने आज उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। यह फैसला न्यायाधीश स्वयं प्रकाश दुबे, इक्कीसवें अपर […]

You May Like