
जबलपुर । वर्तिका महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय साहित्य जगत में महिलाओं का योगदान अद्वितीय, स्मरणीय और प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने न केवल साहित्य को समृद्ध किया बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कुठाराघात करते हुए जनमानस को जागरूक किया महिला साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक अन्याय, महिलाओं के अधिकार, स्वतंत्रता संग्राम और मानवीय संवेदनाओं को भी सशक्त रूप में प्रस्तुत किया है कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉक्टर छाया सिंह एवं अध्यक्षता छाया त्रिवेदी द्वारा की गई विशिष्ट अतिथि के रूप में शशिकला सेन एवं अमित सिंह बाबा मुख्य वक्ता राजेश पाठक प्रवीण द्वारा विचार रखे गए संस्थागत उद्बोधन विजय नेमा एवं अतिथियों का स्वागत संतोष नेमा द्वारा किया गया कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा अखिलेश श्रीवास्तव, सरस्वती वंदना तरुणा खरे एवं आभार मदन श्रीवास्तव जी द्वारा प्रस्तुत किया गया। द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें डॉ सरिता अग्निहोत्री, डॉ सुनीता गुप्ता, एड. प्रभा खरे, रजनी कटारे, अनुराधा गर्ग, अमित सिंह बाबा, ज्योति, प्यासी, गोवर्धनसिंह फ़ौदार सच्चिदानन्द, प्रकाश सिंह ठाकुर, प्रो शरद नारायण खरे, डॉ कृष्ण कुमार नेमा आदि मौजूद रहे।
