
नई दिल्ली, 11 नवम्बर: बिहार में दूसरे चरण के मतदान के बाद चुनावी नतीजों की उलटी गिनती शुरू हो गई है। राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार कांग्रेस (61 सीटें) और एलजेपी (R) (28 सीटें) का प्रदर्शन निर्णायक साबित होगा। एलजेपी (R) जिन 28 सीटों पर लड़ रही है, वहाँ 2020 में महागठबंधन के उम्मीदवारों ने भारी जीत हासिल की थी, जिससे यह एनडीए के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
कांग्रेस की कमजोर पकड़ और ‘फ्रेंडली फाइट’
कांग्रेस द्वारा जीती गई 61 सीटों में से 38 पर महागठबंधन का पिछला रिकॉर्ड बहुत कमजोर रहा है। इन कमजोर सीटों पर अगर कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है, तो यह महागठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित होगा और आरजेडी पर अपनी संख्या बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा, कांग्रेस की 9 सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” देखने को मिल रही है, जहाँ राजद और वामपंथी दलों के उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जिससे वोट बैंक का बिखराव तय है।
एलजेपी (R) की चुनौतीपूर्ण सीटें
एलजेपी (R) जिन सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उनका चुनावी इतिहास चुनौती भरा है। 2020 में, इनमें से अधिकांश सीटों पर आरजेडी या वाम दलों का दबदबा था, जैसे कि सिमरी बख्तियारपुर, मनेर और गोविंदपुर। यहाँ आरजेडी ने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। एलजेपी (R) को अब उन सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी जहाँ पहले महागठबंधन का मज़बूत आधार था, जिससे एनडीए की राह आसान हो सके।
