नयी दिल्ली, 12 मार्च (वार्ता) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक एलपीजी आपूर्ति में आयी बाधा और उसके चलते ऑर्डर में आयी भारी गिरावट का हवाला देते हुए ‘गिग एवं प्लेटफॉर्म सेवा कर्मचारी संघ’ (जीआईपीएसडब्लूयू) ने गुरुवार को फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्मों से मुआवजे और आईडी निलंबन से सुरक्षा की मांग की है।
श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को लिखे पत्र में संघ ने कहा कि जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्मों पर फूड डिलीवरी के ऑर्डर में 50-60 प्रतिशत तक की गिरावट आयी है।
संघ ने इस गिरावट का कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की वजह से रेस्तरां, ढाबों, क्लाउड किचन, कैटरिंग सेवाओं और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं का बंद होना बताया है। उनके अनुसार, यह किल्लत अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से जुड़ी वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आये व्यवधान के कारण पैदा हुई है।
यूनियन ने कहा कि एलपीजी आपूर्ति शृंखला में इस बाधा ने गिग कर्मचारियों की आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे कई श्रमिक घर के बुनियादी खर्चों को पूरा करने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
संघ के प्रवक्ता निर्मल गोराना ने कहा, “हमारे सदस्य भुखमरी की कगार पर हैं। सैकड़ों लोगों ने हमसे संपर्क किया है, जिनके परिवार दो वक्त की रोटी को तरस रहे हैं और बच्चे भूखे सो रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि गिग कर्मचारी, जिनके पास न तो कोई तय वेतन है और न ही सामाजिक सुरक्षा, इस मंदी की सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं।
दिल्ली के एक डिलीवरी कर्मी ने कम होते ऑर्डरों के बावजूद श्रमिकों पर बढ़ते दबाव का जिक्र करते हुए कहा, “दिन भर में 30 डिलीवरी से गिरकर अब केवल 5-10 रह गयी हैं, ऊपर से कंपनियां मेरी आईडी निलंबित करने की धमकी दे रही हैं।”
संघ ने कहा कि इस मंदी का असर खाद्य आपूर्ति शृंखला से जुड़े अन्य कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है। टैक्सी सेवा ड्राइवरों को रेस्तरां से मिलने वाले फेरों में कमी आयी है, जबकि क्लाउड किचन में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरियां जा रही हैं।
श्री गोराना ने कहा, “अनुमान है कि लगभग एक करोड़ कर्मचारी इससे प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें गिग एवं प्लेटफॉर्म कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा शामिल है। वर्तमान संकट अब एक आपदा में बदल रहा है।”
उन्होंने कहा, “कंपनियों की ऑर्डर्स में आयी गिरावट की सजा कर्मचारियों को नहीं देनी चाहिए। इसके बजाय उन्हें मुआवजा देना चाहिए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”
यूनियन ने श्रम मंत्रालय से आग्रह किया है कि गिग कर्मचारियों के इस संकट को दूर करने के लिए फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्मों और तेल कंपनियों के साथ 48 घंटे के भीतर एक आपातकालीन बैठक बुलायी जाए।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से संघ की मुख्य मांग यह है कि वह खाद्य व्यवसायों को कमर्शियल एलपीजी निर्बाध आपूर्ति चौबीसों घंटे सुनिश्चित करे। इसके अलावा संघ ने प्रत्येक प्रभावित कर्मचारी के लिए संबंधित प्लेटफॉर्मों से 10,000 रुपये की तत्काल राहत, आईडी के निलंबन पर तीन महीने की रोक और आय के नुकसान की भरपाई के लिए न्यूनतम दैनिक प्रोत्साहन देने की मांग की है।
यूनियन ने सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत गिग कर्मचारियों को पूर्ण कवरेज और सुरक्षा देने की अपनी पुरानी मांग को भी एक बार फिर दोहराया है।
