नयी दिल्ली, 12 मार्च (वार्ता) वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को अपनी सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचनाओं को मजबूत बनाने तथा मिल कर काम करने के लिए कंसोर्टियम आधारित दृष्टिकोण अपने को कहा ताकि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिन-रात बेहतर सेवा कर सकें।
भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने डीएफएस के मार्गदर्शन में राजधानी में ” आरआरबी में अगली पीढ़ी के सुधार – चुनौतियां और अवसर ” विषयक सम्मेलन में इन बैंकों के लिए अगली पीढ़ी के सुधारों की दिशा में अवसरों, चुनौतियों और रोडमैप पर विचार-विमर्श किया गया। इसका उद्देश्य उनकी अवसंरचना और कार्यप्रणाली मजबूत बनाना है। विकसित भारत 2027 के लक्ष्य में आरआरबी की भूमिका के महत्व पर भी चर्चा की गयी।
वित्त मंत्रालय की आरे से गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इस कार्यक्रम में डीएफएस के संयुक्त सचिव आशीष माधवराव मोरे ने कंसोर्टियम आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करने और आईटी अवसंरचना के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी आरआरबी का दृष्टिकोण ऐसा होना चाहिए कि वे “ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए हमेशा उपलब्ध रहने वाले बैंक” के रूप में कार्य करें। उन्होंने आरआरबी से आग्रह किया कि वे नवोन्मेषी पहुंच कार्यक्रमों, सहकर्मी सर्वोत्तम विधियों, स्थानीय भाषाओं के अनुकूल डिजिटल सेवाओं तथा डिजिटल चैनलों पर बनाए गये प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से ग्राहकों के साथ जुड़ाव को बढ़ाएं।
बैठक में आईबीए के मुख्य कार्यकारी अतुल कुमार गोयल, नाबार्ड के उप प्रबंध निदेशक गोवर्धन एस. रावत, वित्तीय सेवा विभाग और आरआरबी के प्रायोजक बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साथ विभिन्न आरआरबी के अध्यक्षों ने भी भाग लिया। बैठक में उभरते भारत के लिए बैंकिंग, कृषि वित्तपोषण में नवाचार, डिजिटल एवं प्रौद्योगिकी परिवर्तन, वित्तीय समावेशन एवं ग्राहक की सुविधा , आरआरबी के लिए मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण और सहयोगात्मक दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गयी।

