नयी दिल्ली, 12 मार्च (वार्ता) सरकार ने कहा है कि मत्स्य पालन विभाग (डीओएफ) ने विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत बाँध के ऊपरी क्षेत्रों और जलाशयों में मत्स्य पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक कदम उठाये हैं। मछली पालन की इन अप्रयुक्त सुविधाओं और संसाधनों का लाभ उठाने के लिए, मत्स्य पालन विभाग ने सभी राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और हितधारकों के परामर्श से ‘जलाशय मत्स्य पालन प्रबंधन के लिए मॉडल दिशानिर्देश’ तैयार किए हैं और कार्यान्वयन के लिए सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को भेजे हैं। यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, सरकार ने जलाशय मत्स्य पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यों का समर्थन किया है। इनमें 62,836 पिंजरों की स्थापना, 545 हेक्टेयर पेन का निर्माण, 3.0 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फिंगरलिंग का संचयन और 2,171.37 करोड़ रुपये की लागत से 23 जलाशयों का एकीकृत विकास शामिल है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की घोषणा की गई है।

