मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
भाजपा ‘प्रशिक्षण वर्ग’ के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर हिदायत देती रही है- जनसेवक बनो, शासक नहीं. प्रेम से बोलो, सोच समझकर बोलो और बोलने से पहले सोचो कि क्या बोलना भी है? सो उज्जैन उत्तर से भाजपा के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने पहली लाइन आत्मसात कर ली. अपने विधान सभा क्षेत्र में सडक़ चौड़ीकरण की जद में आ रहे घर-परिवारों को नोटिस मिलते ही होली के मौके पर कालूहेड़ा पर जन सेवा का रंग हावी हो गया और अपनी ही सरकार की सडक़ चौड़ीकरण योजना का विरोध करते हुए प्रभावितों का समर्थन करने के साथ आंदोलन की चेतावनी भी दे डाली यही नहीं भाजपा विधायक ने सीएम मोहन यादव को इस बारे में एक पत्र भी लिख दिया. अब यहीं से बखेड़ा शुरू हो गया. सिंहस्थ की तैयारियों के बीच बाधक बन रहे कालूहेड़ा को आनन-फानन भोपाल से बुलावा आ गया. मुख्यमंत्री हाउस में सीएम मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी ने उनकी क्लास ले डाली. उन्हें जनसेवक बनो, शासक नहीं के बाद की लाइन सोच समझकर बोलो का अर्थ भी समझा दिया. उनके जनसेवक के रंग की खुमारी उतार बेरंग कर दिया. उसके बाद विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के सुर बदल गए हैं. शीर्ष नेताओं की क्लास के बाद कालूहेड़ा ने अपने बयानों पर खेद जताया और अब सिंहस्थ के कार्यों में पूर्ण सहयोग देने का वादा किया है.
सिंघार की मंशा पर पानी फिरा
विधानसभा सत्र के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के मध्य हुई कहा-सुनी से उपजा विवाद अभी भी शांत नहीं हुआ है. हाल ही में आलीराजपुर में आयोजित भगोरिया उत्सव में दोनों का आमना-सामना हो गया. उत्सव की मिठास राजनीतिक तल्खी में बदल गई. औकात के मुद्दे पर उमंग सिंघार ने विजयवर्गीय को घेरने की भरपूर कोशिश की, पर विषम परिस्थिति को अपने स्वभाव के मुताबिक विजयवर्गीय टाल गए. उन्होंने आदिवासियों के अपार समूह के बीच सिंघार को कोई मौका नहीं दिया और सिंघार की उनसे उलझने की मंशा पर पानी फेर दिया.
जिला पंचायत अध्यक्ष का गुस्सा फूटा
खंडवा संसदीय क्षेत्र में सांसद और वरिष्ठ भाजपा विधायक के बीच आए दिन की मनमुटाव की खबरें जगजाहिर हैं. अब भाजपा राजनीति में खंडवा जिला भी गुटबाजी में उलझ गया है. यहां स्थानीय विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष की खींचतान विगत दिनों सडक़ पर आ गई. विगत दिनों पार्टी कार्यालय में आयोजित आजीवन सदस्यता निधि की महत्वपूर्ण बैठक में हंगामा हो गया जब जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े ने संगठन में खुद को दरकिनार किए जाने पर खुलेआम मोर्चा खोल दिया. उन्होंने पार्टी कार्यक्रमों में अपनी अवहेलना पर कर्ताधर्ताओं को खरी-खरी सुना दी. सत्ता और प्रशासन में पहले ही हाशिए पर चल रहीं वानखेड़े ने भारी सभा में माइक थामकर दो-टूक कहा, मैं एक जनप्रतिनिधि हूँ, लेकिन मुझे पार्टी की बैठकों की सूचना तक नहीं दी जाती, मेरे साथ जो हो रहा है, वह गलत है. वानखेड़े की तीखी आपत्ति से असहज हुए जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने तुरंत डैमेज कंट्रोल की कोशिश की. उन्होंने सार्वजनिक रूप से खेद जताते हुए माफी मांगी और स्वीकार किया कि वानखेड़े एक सम्मानित पद पर हैं. जिलाध्यक्ष ने इस चूक का ठीकरा जिला महामंत्री धर्मेंद्र बजाज के सिर फोड़ते हुए कहा कि सूचना देने की जिम्मेदारी उनकी थी. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस ‘चूक’ को महज तकनीकी गलती नहीं, बल्कि गहरी गुटबाजी से जोडक़र देखा जा रहा है. यह पूरा मामला विधायक कंचन तनवे और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान का नतीजा बताया जा रहा है. दरअसल, महामंत्री धर्मेंद्र बजाज को विधायक का बेहद करीबी माना जाता है. चर्चा है कि इसी ‘करीबी’ के चलते जानबूझकर प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर जिला पंचायत अध्यक्ष को सूचना नहीं दी गई.
