वॉशिंगटन/तेल अवीव, 09 मार्च (वार्ता) ईरान के ईंधन भंडार स्थलों पर सप्ताहांत में किए गए इज़रायली हवाई हमलों के बाद अमेरिका और इज़रायल के बीच मतभेद उभर आए हैं। यह 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली बड़ी असहमति मानी जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, इज़रायल ने हमलों की योजना के बारे में पहले ही अमेरिकी प्रशासन को सूचित कर दिया था, लेकिन अभियान का पैमाना अमेरिकी अनुमान से कहीं अधिक बड़ा निकला, जिससे अमेरिका नाराज है।
इज़रायली वायुसेना ने शनिवार को ईरान में लगभग 30 ईंधन डिपो को निशाना बनाया, जिससे राजधानी तेहरान में बड़े पैमाने पर आग लग गयी और शहर के कई हिस्सों में दूर तक धुआं दिखाई दिया।
इज़रायली रक्षा बल (आईडीएफ) के अधिकारियों के अनुसार इन डिपो का उपयोग ईरानी सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर सैन्य इकाइयों को ईंधन आपूर्ति के लिए किया जा रहा था। एक इज़रायली सैन्य अधिकारी ने कहा कि इन हमलों का उद्देश्य यह संदेश देना भी था कि ईरान को इज़रायल के नागरिक ढांचे पर हमले बंद करने चाहिए।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अभियान का व्यापक पैमाना उनके लिए अप्रत्याशित था। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इन हमलों को “अप्रत्याशित” बताते हुए कहा कि अमेरिका इसे अच्छा कदम नहीं मानता।
व्हाइट हाउस और आईडीएफ ने इस मतभेद पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि ईंधन भंडार स्थलों पर हमलों की तस्वीरें वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता पैदा कर सकती हैं और तेल की कीमतों में ज्यादा वृद्धि का कारण बन सकती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सहयोगी ने कहा कि ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करने वाले हमले अमेरिकी मतदाताओं को बढ़ती ईंधन कीमतों की याद दिला सकते हैं।
इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। खातम अल-अनबिया केन्द्रीय मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि ईरान अब तक क्षेत्रीय तेल और ईंधन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से बचता रहा है, लेकिन हमले जारी रहने पर वह अपनी नीति पर पुनर्विचार कर सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान क्षेत्र की ऊर्जा संरचनाओं को निशाना बनाता है तो वैश्विक तेल कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने भी कहा कि यदि बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे तो ईरान बिना देरी के जवाब देगा।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हमलों के दायरे को लेकर अमेरिका और इज़रायल के बीच मतभेदों पर जल्द ही दोनों देशों के वरिष्ठ स्तर पर चर्चा होने की संभावना है।
इससे पूर्व, ईरान ने सोमवार को मुजतबा खामेनेई को अपना नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया।
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी (एमएनए) ने बताया, “ईरान इस्लामी गणराज्य की विशेषज्ञों की परिषद ने सोमवार तड़के आयतुल्ला सैय्यद मुजतबा खामेनेई को इस्लामिक क्रांति का तीसरा नेता घोषित किया।”
आठ सितंबर 1969 को मशहद में जन्मे श्री मुजतबा ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं। उनका चुनाव 88 सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने किया। वह ईरान के राजनीतिक हलके में एक चर्चित शख्सियत हैं, तथा ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं।
यमन के हूती समूह ने श्री मुजतबा को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किए जाने का स्वागत किया है और इसे ईरान के भीतर एकता और शक्ति का प्रतीक बताया है।
इस बीच, ईरान ने अपने नये सर्वोच्च नेता के चयन के साथ ही इजरायल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर नये हमले किये। इन हमलों में ड्रोन के साथ-साथ खुर्रमशहर, फतह और खैबर हाइपरसॉनिक एवं बैलिस्टिक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया गया।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अधिकारियों ने बताया कि राजधानी अबू धाबी में हुए हवाई हमलों को रोक लिया गया लेकिन हमलों का मलबा दो अलग-अलग स्थानों पर गिरने से दो लोग घायल हो गये। तुर्की ने कहा कि ईरान की तरफ़ से उसकी ज़मीन पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी गयी, जिसे नाटो की वायु रक्षा प्रणाली ने रोक लिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि इस तरह के किसी भी हमले को नकार दिया।
इस सब के बीच सऊदी अरब ने ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वह अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और अपने नागरिकों तथा निवासियों की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है।
इस दौरान श्री ट्रंप ने ‘द टाइम्स ऑफ इज़रायल’ के साथ एक टेलीफोन साक्षात्कार में कहा है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष को कब समाप्त करना है, इसका निर्णय इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर लिया जाएगा।
श्री ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि यह कुछ हद तक आपसी है। हम बात कर रहे हैं। मैं सही समय पर फैसला लूंगा लेकिन हर बात को ध्यान में रखा जाएगा।”
उन्होंने सुझाव दिया कि अंतिम फैसला उनका होगा, लेकिन श्री नेतन्याहू के विचारों पर भी विचार किया जाएगा। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा जोखिमों के कारण सऊदी अरब से गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश दिया है।
