डॉ रवि तिवारी
प्रदेश में अधिकारों के विकेंद्रीकरण की बयार में जिला सरकार का सिद्धांत को वर्षों पहले अमल में लाया गया था. इसी समिति के माध्यम से जिला योजना का निर्माण किया जाता था. पिछली सरकारों ने अधिकारों के विकेंद्रीकरण की इस मुहिम को पलीता लगाते हुए पूर्व में दिए अधिकारों को धीरे-धीरे न सिर्फ वापस ले लिए हैं बल्कि अब जिला योजना समिति के अस्तित्व को समाप्त कर जिला विकास समिति के नए प्रावधानों को लागू कर दिया है. निचले स्तर में विकास कार्यों के चयन और प्राथमिकता के मद्देनजर गठित की गई समितियां विन्ध्य के कुछ जिलों में अपना स्वरूप तय कर चुकी हैं, पर अभी भी कुछ जिलों में समितियों के गठन की घोषणा शेष है.
विकास कार्य कब तय होंगे यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन करीब-करीब यह तय हो चुका है कि आने वाले समय मे सत्तारूढ़ दल जिसे चाहेगी वही नेता समाज जीवन के क्षेत्र में काम कर सकेगा शेष पंचायतीराज और नगरीय निकाय से सामने आने वाले जनप्रतिनिधियों का कोई अस्तित्व नहीं रहेगा. जेबी नेताओं को अवसर देने की नियत से जो परिवर्तन किए हैं उनके कारगर होने को लेकर अभी से संदेह होने लगा है. देखने में आया है कि पहले लोकतांत्रिक ढंग से सदस्य चुनने की परंपरा को समाप्त कर सदस्यों के मनोनयन का निर्णय लिया है. इससे ऐसे नेता जिन्हें पार्टी या संगठन का दायित्व नही दिया जा सकता उन्हें विकास समिति में खपा कर संतुष्ट कराने का प्रयास किया जा रहा है.
जब टूट गया मंच
सिंगरौली में होली मिलन समारोह के दौरान जब अचानक मंच टूट गया. जिला अध्यक्ष सहित कार्यकर्ता नीचे गिर गये. हालाकि किसी को गंभीर चोट नही आई, अफरा-तफरी जरूर मच गई. दरअसल बीजेपी कार्यकर्ताओं ने होली मिलन समारोह रखा था जिसमें विधायक के साथ जिलाध्यक्ष सुन्दरलाल शाह भी शामिल हुए और जब जिलाध्यक्ष ने मंच से अपना सम्बोधन शुरू किया तभी अचानक भरभरा कर मंच टूट गया. उसके बाद जमकर ठहाके लगे. गनीमत रही कि जिलाध्यक्ष सहित सभी सुरक्षित रहे, हल्की चोट जरूर आई है. मंच टूटने का वीडियो किसी ने बनाकर सोशल मीडिया में डाल दिया. मजे की बात तो यह है कि मंच टूटने के तत्काल बाद जिलाध्यक्ष करंट की गति से भी तेज खड़े हुए और अपना सम्बोधन शुरू कर दिया.
महापौर और आयुक्त के बीच बढ़ा टकराव
नगर पालिक निगम सिंगरौली में सब कुछ ठीक ठाक नही चल रहा है. यहा महापौर और आयुक्त के बीच टकराव कम होने का नाम नही ले रहा है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को समय पर प्रस्तुत न किये जाने को लेकर महापौर रानी अग्रवाल ने नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक लापरवाही कहा है. दरअसल गत माह हुई विशेष बैठक के दौरान महापौर एवं आयुक्त के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ बात बढ़ गई थी. माना जा रहा है कि उसी नाराजगी को भुनाने के लिये आयुक्त पर महापौर ने फिर बजट को लेकर निशाना साधा है. इस विवाद से दोनो का भले ही कोई नुकसान न हो, लेकिन शहर का नुकसान जरूर हो रहा है. विकास की गतिविधिया प्रभावित हो रही है. आयुक्त पर लगातार महापौर निशाना साध रही है जिससे यह टकराव कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है. मौजूदा हालात ठीक नही है पार्षदो के साथ भी बेहतर तालमेल महापौर के नही बन पा रहे है. विपक्षी पार्षद कामकाज को लेकर पहले से ही सवाल उठाते रहे है.
यूपीएससी में विंध्य का दबदबा
विंध्य प्रतिभाओं की खान है यहा की प्रतिभाए हर क्षेत्र में लोहा मनवाती रही है. हर क्षेत्र में विंध्य के लोगो ने अपना झंडा गाड़ा है इस बार यूपीएससी के आए परीक्षा परिणाम में विंध्य का दबदबा रहा है. मऊगंज की समीक्षा ने 56 वीं रैंक हासिल की. वही सतना के यशवर्धन और भूमिका ने भी जिले का नाम रोशन किया है. ऊर्जाधानी के सुमित ने 746 वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है. कड़ी मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पित भाव से किये गये मेहनत का परिणाम है कि यूपीएससी में विंध्य के होनहार युवा अपना स्थान बनाने में सफल रहे. विंध्य की यह वही माटी है जहा से निकले युवा आज देश के शीर्ष पदो पर है
